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लोकतंत्र के लिए कैंसर है भ्रष्टाचार: मुखर्जी

लोकतंत्र के लिए कैंसर है भ्रष्टाचार: मुखर्जी

नई दिल्ली. 25 जनवरी 2013

प्रणब मुखर्जी


राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 65वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संदेश में कहा कि भ्रष्टाचार लोकतंत्र के लिए कैंसर की तरह है, जो हमारे राज्य की जड़ों को खोखला करता है. उन्होंने कहा कि यदि भारत की जनता गुस्से में है, तो इसका कारण है कि उन्हें भ्रष्टाचार तथा राष्ट्रीय संसाधनों की बर्बादी दिखाई दे रही है. यदि सरकारें इन खामियों को दूर नहीं करतीं तो मतदाता सरकारों को हटा देंगे.

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में पाखंड का बढ़ना भी खतरनाक है. चुनाव किसी व्यक्ति को भ्रांतिपूर्ण अवधारणाओं को आजमाने की अनुमति नहीं देते हैं. जो लोग मतदाताओं का भरोसा चाहते हैं, उन्हें केवल वही वादे करने चाहिए जो संभव हैं.

उन्होंने कहा कि सरकार कोई परोपकारी निकाय नहीं है. लोकलुभावन अराजकता, शासन का विकल्प नहीं हो सकती. झूठे वायदों की परिणति मोहभंग में होती है, जिससे क्रोध भड़कता है तथा इस क्रोध का एक ही स्वाभाविक निशाना होता है : सत्ताधारी वर्ग.

राष्ट्रपति ने कहा कि यह क्रोध केवल तभी शांत होगा जब सरकारें वह परिणाम देंगी जिनके लिए उन्हें चुना गया था. अर्थात सामाजिक और आर्थिक प्रगति, कछुए की चाल से नहीं बल्कि घुड़दौड़ के घोड़े की गति से हो. महत्वाकांक्षी भारतीय युवा अपने भविष्य से विश्वासघात को क्षमा नहीं करेंगे. जो लोग सत्ता में हैं, उन्हें अपने और लोगों के बीच भरोसे में कमी को दूर करना होगा. जो लोग राजनीति में हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि हर एक चुनाव के साथ एक चेतावनी जुड़ी होती है : परिणाम दो अथवा बाहर हो जाओ
 


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