पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >दिल्ली Print | Share This  

ब्लू स्टार में ब्रिटेन की भूमिका नहीं

ब्लू स्टार में ब्रिटेन की भूमिका नहीं

लंदन. 5 फरवरी 2014

मारग्रेट थैचर


ऑपरेशन ब्लू स्टार में ब्रिटेन की भूमिका सीमित और लगभग सलाहकार जैसी थी. ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग के ब्रिटिश संसद में दिये गये इस बयान के बाद भारत में हलचल मची हुई है.

एक जांच रिपोर्ट के बाद अपने बयान में विलियम हेग ने कहा कि ब्रिटेन की सहायता की प्रकृति बिल्कुल सलाहकार की और सीमित थी तथा भारत सरकार को उसकी योजना के शुरूआती चरण में यह सलाह मुहैया करायी गयी थी. कैबिनेट सचिव की रिपोर्ट में मौजूदा सैन्य कर्मी का एक विश्लेषण भी शामिल है, जिसके मुताबिक जून 1984 का वास्तविक अभियान फरवरी में ब्रिटिश सैन्य परमार्शदाता द्वारा दिए गए सुझाव से अलग था. ऑपरेशन ब्लूस्टार एक जमीनी हमला था. इसमें चौंकाने वाली कोई चीज नहीं थी.

हेग ने कहा कि परमार्शदाता ने स्पष्ट कर दिया था कि एक सैन्य अभियान आखिरी उपाय के रूप में तभी प्रभावी होगा जब वार्ता की सारी कोशिशें नाकाम हो जाएं. सैन्य सलाह देने का यह काम दोहराया नहीं गया और कैबिनेट सचिव ने उपकरण या प्रशिक्षण जैसी किसी अन्य सहायता का कोई सबूत नहीं पाया.

गौरतलब है कि इस साल 15 जनवरी को ऑपरेशन ब्लू स्टार के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बरार ने भी कहा था कि किसी ने भी न ही हमारी योजना में हमारी मदद की और न ही इसमें अंजाम देने में.

भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने साल 14 जून 1984 को ऑपरेशन ब्लूस्टार के ठीक बाद अपनी ब्रिटिश समकक्ष मार्गरेट थैचर को एक निजी खत भेजा था, जिसमें स्वर्ण मंदिर से आतंकवादियों को खत्म करने के लिए सेना भेजने के फैसले को जायज ठहराने की कोशिश की गई थी.

इस पत्र में इंदिरा गांधी ने लिखा था कि किसी पूजास्थल पर सैन्य कार्रवाई करना आसान नहीं था लेकिन आतंकवादियों ने इस स्थान को अपने गतिविधियों के गढ़ के रूप में तब्दील कर दिया था.हम नहीं जानते थे कि वहां हथियार लिए जा रहे हैं. कार्रवाई के आखिरी सप्ताह के बाद हमें अहसास हुआ कि ये हथियार कितने अत्याधुनिक थे.हमारे पास सेना की टुकड़ी को भेजने के सिवाय कोई दूसरा चारा नहीं था. सैनिकों ने न्यूनतम बल का उपयोग करते हुए पूरे संयम का परिचय दिया.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in