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आतंकी खतरों से निपटने का आह्वान

आतंकी खतरों से निपटने का आह्वान

नई दिल्ली. 7 फरवरी 2010


आतंरिक सुरक्षा के मुद्दों पर केंद्र तथा राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि एक दूसरे के हाथ मजबूत करके ही आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे को सुलझाया जा सकता है.

मनमोहन सिंह ने यहां आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आतंरिक सुरक्षा ऐसा क्षेत्र है, जिस पर केंद्र तथा राज्यों को लगातार निगरानी और समन्वय बनाए रखने की जरूरत है. हमें देश में सुरक्षा सुनिश्चित करने की मौजूदा प्रणालियों की नियमित रूप से मिलकर समीक्षा करनी चाहिए तथा खतरों का आकलन कर जरूरी कार्रवाई करनी चाहिए.

उन्होंने जम्मू एवं कश्मीर और पूर्वोत्तर में आतंकवाद, जनजातीय बहुल इलाके में नक्सली हिंसा और सांप्रदायिक ताकतों को देश के लिए सबसे बड़ा खतरा करार दिया. प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर में उग्रवाद और हिंसक घटनाएं हो रही हैं. कई राज्य नक्सलवाद से प्रभावित है, जिन्हे उन्होंने पहले भी देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा करार दिया था. उन्होंने राज्य और केंद्र सरकारों से इनसे दृढ़ संकल्प से निपटने का आह्वान किया.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुख्यमंत्रियों से अपने राज्यों में त्वरित कार्रवाई दस्तों की गति तथा निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने के लिए विशेष हस्तक्षेप इकाइयां गठित करने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि राज्य आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए विशेष कमांडो बल भी गठित करना चाहेंगे. उन्होंने राज्यों से अपनी गुप्तचर क्षमताएं बढ़ाने के लिए केंद्र द्वारा उनकी विशेष शाखाओं की मदद के लिए बनायी गयी योजना का पूरा फ़ायदा उठाने का अनुरोध किया.

पुलिस में खाली पदों को भरने तथा प्रशिक्षण पर अधिक ध्यान नहीं दिये जाने की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि गत सितंबर तक राज्यों तथा केंद्र शासित क्षेत्रों पुलिस बलों में करीब तीन लाख 94 हजार पद रिक्त थे.


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