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हिरासत में सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय

हिरासत में सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय

लखनऊ. 28 फरवरी 2013

subrat roy sahara


सहारा समूह प्रमुख सुब्रत रॉय ने उत्तर प्रदेश पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है. रॉय के खिलाफ बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय ने गैर-जमानती वारंट जारी किया था, लेकिन वारंट जारी होने के बाद से ही वो पुलिस से बचते फिर रहे थे. इसके बाद शुक्रवार को उन्होंने अचानक पुलिस के सामने समर्पण कर दिया. रॉय को चार मार्च को सर्वोच्च न्यायालय के सामने पेश होना है.

उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारियों के मुताबिक राय दिल्ली के एक होटल में एक संवाददाता सम्मेलन करने वाले थे, लेकिन सहारा इंडिया परिवार के अधिकारियों ने पुलिस से कहा कि वह आत्मसमर्पण करना चाहते हैं. उनकी गिरफ्तारी के ठीक बाद दिल्ली पुलिस ने उनकी ट्रांजिट रिमांड की मांग की थी, ताकि उनकी अदालत में पेशी की जा सके.

अभी तक राय को सहारा शहर परिसर में ही रखा गया है, जहां वह रहते हैं. संभव है कि उन्हें घर में ही नजरबंद किया जाए. उनका आत्मसमर्पण मीडिया को दिए बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह फरार नहीं हैं और इसके साथ ही उन्होंने पुलिसकर्मियों से न्यायालय के निर्देश के अनुसार काम करने का अनुरोध किया था.

उन्होंने मीडिया से कहा, "मैं वह इंसान नहीं हूं, जो फरार हो जाए. वास्तव में एक कानून-पालक नागरिक होने के नाते अगर मैं कोई भी ऐसा काम करूंगा तो मुझे अपने आप से घृणा होगी."

सर्वोच्च न्यायालय ने उनके पेश न होने की सूरत में 26 फरवरी को उनके खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया था. शुक्रवार के एक आदेश में न्यायालय ने इस वारंट को वापस लेने से इंकार कर दिया है. राय की अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने कहा, "इस न्यायालय के हाथ बहुत लंबे हैं. हम वारंट जारी करेंगे. यह देश का सर्वोच्च न्यायालय है. जब सभी निदेशक उपस्थित हैं, वह यहां क्यों नहीं आ सकते?"

राय ने कहा कि वह अपनी 92 वर्षीय बीमार मां के साथ रहना चाहते थे इसलिए उपस्थित नहीं हो पाए. सर्वोच्च न्यायालय ने 20 फरवरी को राय को और सहारा इंडिया रियल एस्टेट कारपोरेशन लिमिटेड (एसआईआरईसीएल) तथा सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (एसएचआईसीएल) के तीन निदेशकों-अशोक राय चौधरी, रवि शंकर दूबे और वंदना भार्गव-को 26 फरवरी को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया था.

राय और तीनों निदेशकों को इसलिए व्यक्तिगत रूप से अदालत में पहुंचने का निर्देश दिया गया था, क्योंकि सहारा की कंपनियां निवेशकों से वैकल्पिक रूप से पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर के जरिए जुटाई गई 24 हजार करोड़ रुपये की राशि में से 19,000 करोड़ रुपये की राशि चुकाने के लिए गारंटी के रूप में सेबी के पास बिना कर्ज वाली कुछ संपत्तियों का मालिकाना हक जमा करने में असफल रही है.