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रेप पीड़िताओं के टू फिंगर टेस्ट पर रोक

रेप पीड़िताओं के टू फिंगर टेस्ट पर रोक

नई दिल्ली. 4 मार्च 2013. बीबीसी

रेप पीड़िता


स्वास्थ्य मंत्रालय ने बलात्कार पीड़ितों के संग व्यवहार करने के नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं जिससे पीड़िता का टू फिंगर टेस्ट पर भी रोक लगाई है. इस टेस्ट में डॉक्टर दो अंगुलियों के प्रयोग से यह जानने की कोशिश करते थे कि क्या पीड़िता शारीरिक संबंधों की आदी रही है. मंत्रालय ने इस टेस्ट को अवैज्ञानिक बताते हुए इस पर पाबंदी लगा दी है.

नए दिशा-निर्देशों के तहत सभी अस्पतालों में बलात्कार पीड़ितों के लिए एक विशेष कक्ष बनाने के लिए कहा गया है जिसमें उनका फॉरेसिंक और चिकित्सकीय परीक्षण होगा.

नए दिशा निर्देशों के अनुसार डॉक्टरों को पीड़ित को यह भी बताना होगा कि कौन-कौन से मेडिकल टेस्ट किए जाएंगे और कैसे किए जाएंगे. ये सारी बातें डॉक्टरों को पीड़ित को उस भाषा में समझानी होगी जो उसे समझ में आती हो.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किए हैं.

महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज(एमजीआईएमएस) में क्लिनिकल फ़ॉरेंसिक मेडिकल यूनिट (सीएफ़एमयू) के इंचार्ज एसोसिएट प्रोफ़ेसर इंद्रजीत खांडेकर के एक शोध-पत्र के प्रकाशित होने के बाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी.

खांडेकर का शोध 'यौन हिंसा के मामलों में फॉरेंसिक चिकिस्कीय जांच की दयनीय और भयानक स्थिति' पर था. जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस संदर्भ में नए दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए कहा था.

 

दि डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ रिसर्च (डीएचआर) और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआई) ने कई विशेषज्ञों की सहायता से ये राष्ट्रीय दिशा-निर्देश तैयार किए हैं. ये दिशा-निर्देश आपराधिक हमलों वाले मामले के लिए तैयार किए हैं. माना जा रहा है कि इससे यौन हिंसा की शिकार महिलाओं को 'डरावनी' चिकिस्तकीय जांच से छुटकारा मिल सकेगा.

यौन अपराधों के पीड़ितों को जिन मनोवैज्ञानिक-सामाजिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है उसमें उनकी मदद करने के लिए भी डीएचआर ने निर्देश जारी किए हैं. इन निर्देशों में पीड़िता को मानसिक संताप से उबारने के लिए सलाह देने की बात कही गई है.


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