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दिल्ली गैंगरेप: दो आरोपियों की फांसी पर रोक

दिल्ली गैंगरेप: दो आरोपियों की फांसी पर रोक

नई दिल्ली. 15 मार्च 2014

supreme court


दिल्ली गैंगरेप मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के मृत्युदंड बरकरार रखने वाले फैसले पर 31 मार्च तक रोक लगा दी है. इस मामले के दो दोषियों पवन गुप्ता और मुकेश ने शीर्ष अदालत में फैसले को चुनौती दी है जिसकी सुनवाई में ये फैसला लिया गया है.

मामले में दोषी ठहराए गए पवन गुप्ता और मुकेश ने उल्लेख किया है कि 'रोजाना सुनवाई के तहत वे निष्पक्ष सुनवाई से वंचित रहे और उन्हें अभियोजन पक्ष के मनगढंत और तथ्यों के विपरीत कहानी को स्वीकार करने पर मजबूर किया गया.'

न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई और न्यायमूर्ति शिवकीर्ति सिंह की विशेष पीठ ने 31 मार्च तक मृत्युदंड पर रोक लगा दी है. अदालत ने रजिस्ट्री को अदालती रोक के आदेश को सूचित करने का निर्देश दिया है.

पीठ ने रजिस्ट्री को प्रधान न्यायाधीश पी. सतशिवम के सामने पेश करने के लिए कहा है ताकि वे इस मामले की सुनवाई के लिए उपयुक्त पीठ के पास भेज सकें.

न्यायमूर्ति देसाई ने कहा, "हम पवन और मुकेश की सजा पर 31 मार्च 2014 तक रोक लगाते हैं. मामले पर उपयुक्त पीठ में सुनवाई के लिए पंजीकृत करने के लिए हम रजिस्ट्री को मामला प्रधान न्यायाधीश के सामने पेश करने का निर्देश देते हैं. हम अदालत के रजिस्ट्री को संबंधित व्यक्तियों और अधिकारियों को सूचित करने का निर्देश देते हैं."

मुकेश और पवन की अपील पर वकील एम. एल. शर्मा ने पैरवी की.

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 13 मार्च को मामले के चार दोषियों को निचली अदालत से मिली मौत की सजा को बरकरार रखा था. उच्च न्यायालय ने कहा था कि इनका 'बर्बर' कृत्य 'मानवीय दया' के योग्य नहीं है और 'इस तरह के घिनौने व्यवहार' का समाज मूकदर्शक बना नहीं रह सकता है.

न्यायमूर्ति रेवा खेत्रपाल और न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी की खंडपीठ ने चारों दोषियों मुकेश (26), अक्षय ठाकुर (28), पवन गुप्ता (19) और विनय शर्मा (20) की अपील ठुकरा दी. निचली अदालत ने चारों को 13 सितंबर 2013 को मौत की सजा सुनाई थी.

16 दिसंबर, 2012 को दक्षिणी दिल्ली में चलती बस में एक प्रशिक्षु फीजियोथेरेपिस्ट के साथ छह लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया और पीड़िता को अमानवीय यातनाएं दीं जिससे बाद में उसकी मौत हो गई. मामले में त्वरित अदालत ने चार दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी जिस पर उच्च न्यायालय से पुष्टि होनी थी.

पीड़िता के साथ दुष्कर्म करने वाले छह लोगों में एक किशोर भी शामिल था. आरोपियों ने पीड़िता और उसके पुरुष साथी को सर्दियों की रात में वस्त्रहीन हालत में सड़क पर फेंक दिया और भाग निकले. बाद में पीड़िता को इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया जहां माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में 29 दिसंबर 2012 को उसकी मौत हो गई.

आरोपियों में से एक दिल्ली के तिहाड़ जेल में मृत पाया गया. अपराध में शामिल किशोर को 31 अगस्त 2013 को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने तीन वर्षो के लिए सुधार गृह भेज दिया. जुवेनाइल कानून के तहत यह अधिकतम सजा है.


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