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बीटी बैंगन की बुराई की तो साल भर की जेल

बीटी बैंगन की बुराई की तो साल भर की जेल

नई दिल्ली, 20 फरवरी 2010


सावधान, आने वाले दिनों में बीटी बैंगन या जीएम खाद्य पदार्थों का विरोध आपको भारी पड़ सकता है. केंद्रीय विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय जल्दी ही ऐसा मसौदा लाने की तैयारी में है, जिसके तहत बीटी बैंगन या जीन परिवर्धित यानी जीएम खाद्य पदार्थों का विरोध करने वाले को साल भर की जेल हो सकती है.यहां तक कि इनके विरोध में लेख लिखने वालों को भी तीन माह के लिए जेल भेजा जा सकता है.

केंद्रीय विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय के गलियारों से आने वाली खबरों पर अगर विश्वास किया जाये तो जैव प्रौद्यौगिकी विभाग ने एक मसौदा तैयार किया है, जिसके तहत जीन संवर्धित पौधे, डीएनए वैक्सीन, सेल्यूलर उत्पाद, जीन थैरेपी उत्पाद, स्टेम सेल उत्पाद, कृषि, मत्स्य पालन, वन एवं खाद्य पदार्थो में प्रयुक्त की जाने वाली बैक्टीरियल या एनिमल सेल आदि का विरोध करने, लोगों को गुमराह करने और दुष्प्रचार करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

मसौदे की धारा 63, चैप्टर 13 के तहत किसी उत्पाद को लेकर लोगों को गुमराह करना अपराध है और भाग-1, 2 और 3 में उत्पादों की सूची दी गई है, जिनके विरोध की कीमत आरोपी को चुकाना पड़ेगी. इस मसौदे के अनुसार ऐसे विरोधियों को साल भर के लिये जेल भेजा जा सकता है और दो लाख तक का जुर्माना किया जा सकता है.

इतना ही नहीं, बीटी और जीएम खाद्य पदार्थों से संबंधित दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करने पर या लेख लिखने पर भी तीन माह की जेल और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना किया जा सकता है.

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

lakhan singh (lakhan.78652@rediffmail.com) ambikapur

 
 किस-किस को जेल भेजेंगे. मानवाधिकार की बात करे तो नक्सली, जल-जंगल-जमीन की बात करो तो अपराध. सरकार इन सब के साथ बेशर्मी से खड़ी है. 
   
 

Nand Kashyap (nand.kashyap@yahoo.com) Bilaspur

 
 शायद विज्ञान मंत्रालय अपने आप को विश्व सृजनहार समझ कर ये कदम उठा रहा है. सच ये है कि वह मुनाफाखोर बार्बर कॉर्पोरेट्स के कदमों तले बैठ अपनी वफादारी निभा रहा है. 
   
 

अशोक कुमार पाण्डेय (ashokk34@gmail.com) ग्वालियर

 
 आगे-आगे देखिये होता है क्या? इस विकास के लिये इमरजेंसी ज़रूरी है… 
   
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