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वाराणसी में केजरीवाल बनाम मोदी

वाराणसी में केजरीवाल बनाम मोदी

वारणसी. 25 मार्च 2014

arvind kejriwal and modi


आगामी लोकसभा चुनावों में सत्ता की सबसे बड़ी लड़ाई का केंद्र बनने जा रही वाराणसी में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद प्रत्याशी नरेंद्र मोदी को चुनौती देने की औपचारिक घोषणा कर दी है. इसके साथ ही उन्होने मोदी को खुली बहस की चुनौती भी दी.

हिंदुओं के पवित्र तीर्थस्थलों में से एक काशी के ऐतिहासिक बेनिया बाग मैदान में उन्होंने एक जनसभा में इसकी घोषणा की. यहां के हजारों की भीड़ के बीच करीब एक घंटे तक दिए गए अपने भाषण में केजरीवाल ने मोदी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांध को पराजित कर लोगों से 'क्रांति' की शुरुआत करने का आह्वान किया. उन्होंने राहुल और मोदी को एक ही सिक्के का दो पहलू करार दिया.

मंगलवार की सुबह यहां पहुंचने पर मोदी समर्थकों के विरोध का सामना करने वाले केजरीवाल ने सवाल किया कि आखिर उनका ही विरोध क्यों किया जाता है. उन्होंने लोगों से पूछा कि उन्हें यहां से चुनाव लड़ना चाहिए या नहीं. भीड़ के समर्थन में आवाज उठाने के बाद दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि वे चुनावी चुनौती को स्वीकार करते हैं.

केजरीवाल ने मोदी के गुजरात विकास मॉडल की खिल्ली उड़ाते हुए कहा कि यह केवल झूठ है और मीडिया में साजिश के तहत प्रचारित किया गया है. उन्होंने मोदी को सार्वजनिक रूप से बहस की चुनौती दी.

उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के लिए अपराधियों और दागियों की भीड़ जुटा ली है और उनके कारपोरेट घराने से करीबी रिश्ते हैं जो अपना हित साधने के लिए उन्हें चंदा दे रहे हैं और वे उन्हें विजयी बनाने पर अमादा हैं.

उन्होंने कहा, "कांग्रेसी कांग्रेस छोड़ भाजपा में जा रहे हैं. तो ऐसे में दोनों पार्टियों में क्या अंतर है?"

उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षो के संयुक्त प्रगतिशील गठबंउन के राज से लोग पीड़ित और परेशान हैं. आगामी चुनाव को देश के इतिहास में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला होने की भविष्यवाणी करते हुए केजरीवाल ने कहा, "हमें संप्रग और राजग दोनों को पराजित करना चाहिए."

उन्होंने बताया कि किस तरह उनके साथ कुमार विश्वास ने राहुल गांधी को अमेठी में चुनौती देने की ठानी. उन्होंने कहा, "यदि हम दोनों नेताओं को पराजित करने में कामयाब रहे तो यह राजनीतिक भूचाल साबित होगा."

उनके अनुसार, ऐसा करने से हो सकता है कि राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो, लेकिन इसके बाद एक वर्ष के भीतर फिर से चुनाव होंगे तब देश के ईमानदार लोग चुनाव जीतकर संसद तक पहुंचेंगे.

लोगों से एक महीने की छुट्टी लेकर वाराणसी और अमेठी पहुंचने की अपील करते हुए केजरीवाल ने लोगों से मोदी के मुकाबले चुनाव लड़ने के लिए चंदा भी मांगा. उन्होंने कहा, "मेरे पास पैसा नहीं है. जैसे मदन मोहन मालवीय ने एक-एक रुपये चंदा जमा कर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की थी, वैसे ही मैं भी पैसे जमा करूंगा."

केजरीवाल ने हालांकि यह भी कहा कि उनका मोदी या राहुल गांधी के साथ कोई निजी वैर नहीं है. उन्होंने कहा कि वे वाराणसी से चुनाव लड़ने इसलिए पहुंचे हैं, क्योंकि देश के लोग यही चाहते हैं


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