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सुब्रत रॉय को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत

सुब्रत रॉय को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत

नई दिल्ली. 26 मार्च 2014

sahara subrato roy


सर्वोच्च न्यायालय ने सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय से न्यायिक हिरासत से अंतिरम जमानत पर रिहा होने के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास 10 हजार करोड़ रुपये जमा करने को कहा है.

बाधुवार को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति के.एस. राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति जे.एस. खेहर की पीठ ने कहा कि 10 हजार करोड़ रुपये में से 5,000 करोड़ रुपये अदालत के पास जमा किए जाएं और शेष 5,000 करोड़ रुपये के लिए राष्ट्रीयकृत बैंक की बैंक गारंटी सेबी के पास जमा की जाए.

अदालत के पास जमा की जाने वाली 5,000 करोड़ रुपये की राशि सहारा द्वारा अंतरिम जमानत की शर्तो को पूरा किए जाने के बाद सेबी को जारी कर दी जाएगी.

अदालत ने कहा कि मंगलवार को सहारा द्वारा जमा किए गए प्रस्ताव उसने पढ़ लिया है और यह 31 अगस्त 2012 तथा उसके बाद दिए गए आदेशों के अनुरूप नहीं है. अदालत ने कहा कि वह सहारा समूह के प्रमुख और उनके दो निदेशकों को जमानत देना चाहती है, बशर्ते वे सेबी के पास 10 हजार करोड़ रुपये जमा कर दें.

अदालत ने कहा, "हम अंतरिम जमानत देना चाहतते हैं बशर्ते वे 10,000 करोड़ राशि का भुगतान करें, जिनमें से 5,000 करोड़ रुपये इस अदालत के पास जमा किए जाएं और शेष के लिए सेबी के पक्ष में देय किसी राष्ट्रीयकृत बैंक की बैंक गारंटी इस अदालत में जमा की जाए."

अदालत ने कहा, "हम इस बात को स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि यह आदेश इसलिए दिया गया है कि बाकी बचने वाली राशि का आगे भुगतान किया जा सके."

सहारा समूह के वकील ने कहा कि राय के जेल में रहते इतनी बड़ी राशि जुटाई नहीं जा सकती. इस तर्क को न्यायालय ने स्वीकार नहीं किया. सहारा समूह के वकील सी.ए. सुंदरम ने यह भी अनुरोध किया कि सुब्रत राय को 2,500 करोड़ रुपये जमा करने पर छोड़ दिया जाए और शेष राशि एक महीने की अवधि में जमा कर दी जाएगी.

अदालत ने अपने आदेश पर राय द्वारा प्रतिक्रिया दिए जाने के लिए गुरुवार तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी.

उल्लेखनीय है कि सहारा समूह की कंपनियों-सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कारपोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कारपोरेशन लिमिटेड-ने 3.3 करोड़ निवेशकों से 24,780 करोड़ रुपये की राशि जुटाई थी.

सर्वोच्च न्यायालय ने 31 अगस्त 2012 को आदेश दिया था कि ये पैसे सेबी के जरिए निवेशकों को वापस कर दिए जाएं.
 

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

JUGESH KUMAR VISHWAKARMA [jugeshkumar.vishwakarma@facebook.com] BANGLAHA KUTI NIGHASAN KHERI U P - 2014-03-26 17:55:25

 
  मान. सर्वो.न्यायालय का आदेश शिरोधार्य परंतु देश/राष्ट्र के प्रति इतनी अगाध श्रद्धा रखने वाली तथा बेहद ईमानदार संस्था [अपवाद स्वरूप कुछेक त्रुटियो को छोडकर जो कि इतने विशाल परिवार मे घटित होना स्वाभाविक है] के प्रति मान न्यायालय का इतना शख्त व्यवहार समझ से परे है जो कि भविष्य मे राष्ट्रवादी विचारधारा रखने वाले कार्पोरेट जगत के ह्रदय को कुंठित करने वाला व बिना तार्किक पक्ष सुने जबर्दस्ती थोपा गया निर्णय है इस प्रकार से किये गये निर्णय लोकतंत्र की परिभाषा को महत्वहीन करते हैं मैं जुगेश कुमार विश्वकर्मा ये बात दावे के साथ कहना चाहता हूँ कि \'सहारा\' मे किसी भी सम्मानित जमाकर्ता के साथ अन्याय नही हो सकता है हाँ \'\'न्याय मे विलम्ब हो सकता है परंतु न्याय की अवहेलना नही होगी\'\' उक्त कथन सहारा का एक्दम सत्य है !!हा यदि किसी भी सम्बंधित व्यक्ति/निकाय को सहारा की ईमानदारी अथवा पारदर्शिता पर शक हो तो वह सहारा के निवेशको से पूछे कि जो विवरण उन्होने सहारा को उपलब्ध कराया है क्या वह सही है कि नही !! जय हिंद ! जय हो न्याय के मंदिर की !! 
   
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