पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >दिल्ली Print | Share This  

मनमोहन सिंह पर किताब से भूचाल

मनमोहन सिंह पर किताब से भूचाल

नई दिल्ली. 12 अप्रैल 2014

मनमोहन सिंह


मनमोहन सिंह पर उन्हीं के मीडिया सलाहकार संजय बारू की किताब 'द ऐक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर: द मेकिंग ऐंड अनमेंकिंग ऑफ मनमोहन सिंह' की किताब को लेकर राजनीतिक गलियारे में सनसनी फैली हुई है. हालांकि प्रधानमंत्री कार्यालय ने संजय बारू की इस किताब को लेकर कई सवाल खड़े किये हैं लेकिन जिन तर्कों का सहारा कांग्रेस ले रही है, उसके तथ्य इतने मजबूत नहीं हैं कि वो बारू की किताब का मुकाबला कर सकें.

गौरतलब है कि संजय बारू की 300 पन्नों से अधिक पन्नों की इस किताब में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक रिश्तों की गहरी पड़ताल की गई है. इस किताब में संजय बारु ने लिखा है कि मनमोहन सिंह ने दूसरे कार्यकाल में कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी और सहयोगी दलों के समक्ष घुटने टेक दिए थे. बारू ने मनमोहन सिंह के उस बयान की भी चर्चा की है, जिसमें मनमोहनसिंह ने कथित रुप से बारु को कहा था कि किसी सरकार में सत्ता के दो केंद्र नहीं हो सकते.

संजय बारु का कहना है कि मनमोहन सिंह ने उनसे कथित रुप से कहा था कि सत्ता के दो केंद्र बनने से गड़बड़ी फैलती है. मुझे मानना पड़ेगा कि पार्टी अध्यक्ष सत्ता का केंद्र हैं. सरकार पार्टी के प्रति जवाबदेह है.

इस किताब में कहा गया है कि इसके बाद 2009 में पार्टी की चुनावी जीत के बाद मनमोहन सिंह का ये मानना कि ये उनकी जीत थी, उनकी सबसे बड़ी ग़लती थी. बारु के अनुसार हो सकता है कि मनमोहन सिंह ने खुद को विश्वास दिला लिया हो कि उनके प्रदर्शन के कारण ही वो दोबारा प्रधानमंत्री बन पाए लेकिन कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी उनकी इस राय से असहमत थीं.

इस किताब में लिखा गया है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह किसी भी हालत में ए राजा और टी आर बालु को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं करना चाहते थे. बालु को तो उन्होंने रोक लिया लेकिन राजा के मामले में उनकी नहीं चली. मनमोहन सिंह चाहते थे कि सी रंगराजन को वह अपना आर्थिक सलाहकार नियुक्त करें लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करने दिया गया.

इधर संजय बारु की इस किताब के बाद उनके मौजूदा मीडिया सलाहकार पंकज पचौरी ने किताब में दिए गए तथ्यों को काल्पनिक और चटखारेदार करार दिया है. पीएमओ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि बारू ने इतने अहम पद और उससे जुड़े विशेषाधिकारों का गलत इस्तेमाल किया है. बयान में यह भी कहा गया है कि पूर्व मीडिया अडवाइजर ने अपने व्यवसायिक हितों के लिए इन विशेषाधिकारों व इस पद का गलत इस्तेमाल किया है. इसमें सिंह के उस बयान का जिक्र किया गया है, जब पीएम ने सीनियर एडिटरों से हुई अपनी एक मुलाकात में साफ तौर पर कहा था कि वे बारू की कही बातों पर कतई भरोसा न करें.

हालांकि अब जबकि संजय बारू की किताब सामने आ गई है, माना जा रहा है कि ऐन चुनाव के समय राजनीतिक दल इस किताब को मुद्दा तो बनाएंगे ही.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in