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किन्नरों को मिला कानूनी दर्जा

किन्नरों को मिला कानूनी दर्जा

नई दिल्ली. 15 अप्रैल 2014

किन्नर


सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में मंगलवार को किन्नरों को तीसरे लिंग के रूप में मान्यता दी है. सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि किन्नर समुदाय को तीसरे लिंग का दर्जा दिया जाना चाहिए और सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग मानकर रोजगार में आरक्षण दिया जाना चाहिए.

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूत्र्ति के. एस. राधाकृष्णन और न्यायमूत्र्ति ए. के. सीकरी की पीठ ने केंद्र और राज्य सरकारों को शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में किन्नरों को आरक्षण दिए जाने का निर्देश दिया.

एनएएलएसए ने अदालत से अपील की थी कि किन्नरों को लिंग के तीसरे वर्ग के रूप में मान्यता देकर उन्हें अलग पहचान दी जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए किन्नरों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में शामिल करने को कहा है जिससे उन्हे शिक्षा, रोजगार, यातायात, परिवहन और सार्वजनिक जगहों पर उन्हें इससे जुड़ी सुविधाएं मिलेंगी.

न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों को किन्नरों के लिए कल्याणकारी योजनाएं बनाने के भी निर्देश दिए हैं.


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