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पोर्न पर बैन क्यों है मुश्किल

पोर्न पर बैन क्यों है मुश्किल

नई दिल्ली. 6 मई 2014

वेबसाइट


पोर्न साइटों पर पाबंदी को लेकर सरकार का रुख असल में तकनीक से जुड़ा हुआ है. केंद्र सरकार का कहना है कि पॉर्न कॉन्टेंट वाली सभी वेबसाइट्स को ब्लॉक करना मुमकिन नहीं है. उसके पीछे एक छोटा कारण ये है कि इन साइटों को जिन शब्दों के साथ फिल्टर किया जाएगा, उनमें से कई शब्द साहित्य या दूसरी सामग्रियों के साथ भी इस्तेमाल होते हैं. ऐसे में आम जनता अच्छी सामग्री से भी वंचित हो सकती है.

गौरतलब है कि जस्टिस बी. एस. चौहान की अदालत में चल रहे मामले को लेकर सरकार की ओर से अडिशनल सॉलिसिटर जनरल के. वी. विश्वनाथन ने कहा कि इस तरह की वेबसाइट्स को ब्लॉक करने से अधिक नुकसान होगा, इससे सब कुछ ब्लॉक हो जाएगा. ऐसी वेबसाइट्स को ब्लॉक करने के लिए हरेक कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर लगाना पड़ेगा, जो संभव नहीं है.

पिछले साल जून में 39 पोर्न साइटों पर बैन लगा दिया था. दूरसंचार विभाग ने जिन वेबसाइटों को प्रतिबंधित किया है, वे साइटें विदेशों से होस्टेड थी और अमरीकी कानून की धारा 18 यूएससी 2257 के तहत संचालित होती थी. इसके बाद कई वेब साइटों पर प्रतिबंध की बात कही गई लेकिन मामला अटका रहा.

इंदौर के एक नागरिक द्वारा दायर जनहित याचिका को लेकर चल रही सुनवाई के पक्ष में कई महिला संगठन भी हैं. लेकिन संकट ये है कि तकनीक की इस दुनिया में जब सूचनाओं के सारे स्रोत कहीं और से संचालित हों तब ऐसी साइटों पर बैन मुश्किल है. अमरीका और यूरोप समेत दुनिया के कई देश तीसरी दुनिया के देशों में अपराध को जिस तरीके से बेच रहे हैं, उसने एक नया संकट पैदा कर दिया है. देखना ये होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में किस तरह की व्यवस्था दे पाता है.


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