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रामदेव को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं

रामदेव को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं

नई दिल्ली. 7 मई 2014

बाबा रामदेव


दलित महिलाओं और राहुल गांधी के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने वाले बाबा रामदेव को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली. रामदेव ने अपने खिलाफ विभिन्न स्थानों पर दर्ज एफआईआर को रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत प्रदान करने से इनकार करते हुये कहा कि अभी इस मामले में निचली अदालत की ओर से सम्मन भी जारी नहीं हुआ है. ऐसी स्थिति में सुप्रीम कोर्ट की ओर से हस्तक्षेप उचित नहीं है.

गौरतलब है कि रामदेव ने नरेंद्र मोदी के पक्ष में प्रचार करते हुये कहा था कि राहुल गांधी दलितों के यहां पिकनिक मनाने और हनीमून मनाने जाते हैं. इस बयान को लेकर जब दलित समुदाय ने आपत्ति दर्ज की तो बाबा रामदेव ने खेद प्रकट कर मामले का पटाक्षेप करने की कोशिश की.

लेकिन इस बयान के बाद रामदेव के खिलाफ मुकदमों का दौर शुरु हो गया. सबसे पहले उत्तरप्रदेश और हिमाचल में बाबा रामदेव के योग शिविरों पर प्रतिबंध लगाया गया, उसके बाद उनके खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में मुकदमे भी दर्ज किये गये. इसके खिलाफ रामदेव ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव को बाहर का रास्ता दिखा दिया.

इधर होशियारपुर से बसपा के लोकसभा उम्मीदवार भगवान सिंह चौहान ने सोमवार को होशियारपुर बस स्टैंड के पास रामदेव का पुतला जलाते हुए कहा था कि जो रामदेव का सिर मेरे पास लाएगा, उसे मैं 1 करोड़ रुपये देने को तैयार हूं. बाद में जब मीडिया में बवाल हुआ तो भी चौहान ने कहा कि वे अपने बयान पर कायम हैं. चौहान का कहना था कि अगर रामदेव पूरे महिला समुदाय का अपमान कर सकते हैं तो मैं इस तरह का बयान क्यों नहीं दे सकता.

माना जा रहा है कि इस मामले को लेकर भी बाबा रामदेव अदालत की शरण ले सकते हैं. लेकिन अदालत से उन्हें कितनी राहत मिलती है, यह देखना दिलचस्प होगा. वैसे दलितों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने वाले बाबा रामदेव के लिये इस पूरे प्रसंग को साबित करना भी कोई आसान काम नहीं है.


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