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मोदी के शपथग्रहण पर सवाल

मोदी के शपथग्रहण पर सवाल

नई दिल्ली. 23 मई 2014

नरेंद्र मोदी


नरेंद्र मोदी का शपथग्रहण समारोह विवादों में घिर गया है. एक ओर जहां नरेंद्र मोदी के तामझाम को लेकर राजनीतिक गलियारे में इसे सामंती तौर-तरीका बताया जा रहा है, वहीं कांग्रेस ने भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को बुलाये जाने को लेकर सवाल खड़ा किया है. मोदी की समर्थक मानी जाने वाली एमडीएमके की जयललिता ने तो श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को बुलाये जाने पर सीधे तौर पर मोदी को निशाने पर लिया है.

आम तौर पर शपथग्रहण समारोह में पड़ोसी राष्ट्राध्यक्षों को बुलाने की परंपरा नहीं है. माना जाता है कि सामंती काल में दिखावे के लिये राजा-महाराजा अपने पड़ोसी राजाओं को शपथग्रहण जैसे आयोजनों में बुलाते थे. नरेंद्र मोदी के इस क़दम को भी उसी सामंती परंपरा से जोड़ा जा रहा है.

इधर कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि पूरे देश में घूम-घूम कर पाकिस्तान के साथ कांग्रेस के संबंधों को निशाने पर लेने वाले नरेंद्र मोदी आखिर किन परिस्थितियों में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को अपने शपथग्रहण समारोह में बुला रहे हैं. गौरतलब है कि पाकिस्तान के सैनिकों द्वारा एक भारतीय सैनिक का सिर काट कर ले जाने के मुद्दे पर नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस को पाकिस्तान परस्त और जाने क्या-क्या कह डाला था. अब जबकि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं तो पाकिस्तान ने चार दिनों में ही दो बार भारत पर हमला बोल कर एक जवान को मार डाला. इस पूरे मुद्दे पर नरेंद्र मोदी चुप्पी साधे हुये हैं.

दूसरी नाराजगी जयललिता की है. श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को लेकर जयललिता भी चाहती हैं कि सिंहली और तमिल संघर्षों के मद्देनज़र श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को न बुलाया जाये. लेकिन नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को विशिष्ठ अतिथि के तौर पर बुलाया है और राजपक्षे इस समारोह में शामिल होंगे, इसके संकेत भी हैं. ऐसा होने पर जयललिता खुद शपथग्रहण समारोह का बहिष्कार कर सकती हैं. उनके साथ-साथ श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे का विरोध करने वाले तमिल संगठनों की भी कोई कमी नहीं है.


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