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हीरोपंती देखने का हौसला

हीरोपंती देखने का हौसला

मुंबई. 23 मई 2014

हीरोपंती


अगर आपके पास गरमी के इस मौसम में कोई भी काम नहीं हो तो तेलुगु फिल्म परुगु की हिंदी रिमेक हीरोपंती आप देख सकते हैं. जैकी श्राफ के बेटे टाइगर श्राफ कुल जमा क्या-क्या जानते हैं, उसकी पूरी छौंक-बघार इस फिल्म में है. छौंक-बघार इस हद तक कि आप बोर हो जाएं. वैसे कायदे की बात कही जाये तो हकीकत तो यही है कि फिल्म शुरु होते ही आप बोर होने लग जाते हैं.

फिल्म की कुल जमा कहानी इतनी भर है कि जाटों के इलाके में डान की बेटी शादी वाली रात अपने प्रेमी के साथ भाग जाती है. गांव के जाट चौधरी साहब राकेश के तीन दोस्तों का अपहरण कर डालते हैं. इनमें एक टाइगर श्राफ भी है. टाइगर श्राफ चौधरी साहब को मूर्ख बनाता रहता है.

टाइगर ने जिस लड़की को अपहरण से पहले अपना दिल दिया है, वो चौधरी की बेटी निकलती है. अपहरण के बाद चौधरी के घर रह कर दोनों का प्यार फलता-फूलता है और कहानी खत्म हो जाती है.

इस फिल्म के निर्देशन के लिये आपका नाम शब्बीर खान होना चाहिये और यकीन मानें, यही इस फिल्म के निर्देशक का नाम है, जिन्होंने कमबख्त इश्क जैसी एक और ऐसी ही फिल्म बनाई थी. हीरोपंती फिल्म में घटनाएं इस कदर घटती हैं कि आप निर्देशक को लेकर कोई भी विचार मन में ला सकते हैं. कहीं कोई तर्क नहीं, क्यों कोई सीन है, इसको लेकर भी निर्देशक की सोच क्या है, जान पाना मुश्किल है.

फिल्म में सारा मसाला है. मसाला इस हद तक कि आप को खाने में खाना कम और मसाले का स्वाद और मात्रा कहीं अधिक नज़र आता है. जैकी श्राफ ने अपने बेटे को एक ऐसी फिल्म से लांच किया है, जिसके बाद उन्हें यह बताने की ज़रुरत नहीं पड़ेगी कि उनका बेटा क्या-क्या काम जानता है.


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