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नवाज शरीफ का भारत आना तय

नवाज शरीफ का भारत आना तय

नई दिल्ली. 24 मई 2014

नवाज शरीफ


पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण समारोह में शामिल होंगे. पाकिस्तान प्रधानमंत्री के कार्यालय ने एक ईमेल से इस बात की सूचना सार्वजनिक की है. इससे पहले इस बात को लेकर संशय चल रहा था कि नवाज शरीफ इस कार्यक्रम में शामिल होंगे या नहीं.

इससे पहले बुधवार को पाकिस्तान विदेश विभाग की प्रवक्ता तसनीम असलम ने कहा था कि नरेंद्र मोदी द्वारा प्रधानमंत्री का पदभार ग्रहण करने के बाद वह भारत के साथ 'सार्थक वार्ता' की उम्मीद करता है. भारत ने सोमवार को नई दिल्ली में शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए शरीफ को निमंत्रण भेजा है और यदि शरीफ किसी वजह से नई दिल्ली नहीं जा पाते हैं, तो प्रतिनिधि का चुनाव किया जाएगा.

इसके बाद से पाकिस्तान और भारतीय मीडिया में इस बात को लेकर कई चर्चाएं चल रही थीं. माना जा रहा था कि शरीफ आईएसआई और पाकिस्तान सेना के दबाव में आ कर भारत जाने का अपना इरादा त्याग सकते हैं. लेकिन अंततः शनिवार को इस बात की पुष्टि हो गई कि शरीफ भारत में नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण समारोह में शामिल होंगे.

इधर कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि पूरे देश में घूम-घूम कर पाकिस्तान के साथ कांग्रेस के संबंधों को निशाने पर लेने वाले नरेंद्र मोदी आखिर किन परिस्थितियों में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को अपने शपथग्रहण समारोह में बुला रहे हैं. गौरतलब है कि पाकिस्तान के सैनिकों द्वारा एक भारतीय सैनिक का सिर काट कर ले जाने के मुद्दे पर नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस को पाकिस्तान परस्त और जाने क्या-क्या कह डाला था. अब जबकि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं तो पाकिस्तान ने चार दिनों में ही दो बार भारत पर हमला बोल कर एक जवान को मार डाला. इस पूरे मुद्दे पर नरेंद्र मोदी चुप्पी साधे हुये हैं.

दूसरी नाराजगी जयललिता की है. श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को लेकर जयललिता भी चाहती हैं कि सिंहली और तमिल संघर्षों के मद्देनज़र श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को न बुलाया जाये. लेकिन नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को विशिष्ठ अतिथि के तौर पर बुलाया है और राजपक्षे इस समारोह में शामिल होंगे, इसके संकेत भी हैं. ऐसा होने पर जयललिता खुद शपथग्रहण समारोह का बहिष्कार कर सकती हैं. उनके साथ-साथ श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे का विरोध करने वाले तमिल संगठनों की भी कोई कमी नहीं है. अब जबकि नवाज शरीफ ने भी भारत आना तय कर लिया है, कम से कम मोदी सरकार के लिये यह राहत की बात होगी.


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