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हाईकोर्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की याचिका

हाईकोर्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की याचिका

नई दिल्ली. 08 मार्च 2010


सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देश के मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय को सूचना के अधिकार कानून के तहत लाने जाने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुये कहा है कि आरटीआई के दायरे में आने के बाद न्यायपालिका की स्वतंत्रता को नुकसान हो सकता है.

मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन ने पहले अपने सभी न्यायाधीशों से सलाह-मशविरा किया, इसके बाद कोर्ट में एक याचिका दायर किया गया. याचिका के अनुसार की मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय की सूचनाएं बेहद संवेदनशील होती हैं और इनका खुलासा होने से न्यायपालिका की स्वतंत्रता को नुकसान पहुंच सकता है.

ज्ञात रहे कि इस साल 12 जनवरी को दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा था कि भारत के प्रधान न्यायाधीश का पद आरटीआई कानून के दायरे में आता है और उच्चतम न्यायालय की उस अपील को खारिज कर दिया कि न्यायायिक स्वतंत्रता किसी न्यायाधीश का व्यक्तिगत विशेषाधिकार नहीं है, बल्कि यह उनके ऊपर दी गई जिम्मेदारी है.

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