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महिला आरक्षण बिल राज्यसभा में पास

महिला आरक्षण बिल राज्यसभा में पास

नई दिल्ली. 09 मार्च 2010


सपा, बसपा और राजद के विरोध को किनारे करते हुए महिला आरक्षण विधेयक भारतीय संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में पास हो गया. इससे पहले मंगलवार को सपा-राजद के उन 7 सांसदों को बजट सत्र तक के लिये निलंबित कर दिया गया, जो सोमवार को विरोध प्रदर्शन करते हुए अध्यक्ष की टेबल तक पहुंच कर हंगामा मचा रहे थे.

पहले दिन की तरह ही मंगलवार को भी इस विधेयक का विरोध कर रहे सांसदों ने राज्यसभा में हंगामा खड़ा करने की कोशिश की. लेकिन कांग्रेस, भाजपा और वाम दलों के समर्थन के कारण विधेयक आसानी से पारित हो गया. विधयेक के पक्ष में 186 सदस्यों ने वोट दिया जबकि विरोध में केवल 1 ही मत पड़ा.

वोटिंग में तृणमूल कांग्रेस ने यह कहते हुए हिस्सा नहीं लिया कि सरकार ने उन्हें धोखे में रखा. पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया था कि पहले इस मामले पर एक सर्वदलीय बैठक होगी लेकिन ऐसा नहीं किया गया. 15 सदस्यों वाली बहुजन समाज पार्टी के सांसद इस विधेयक के मौजूदा स्वरुप का विरोध करते हुए मतदान के समय सदन से बाहर चले गए.

विधेयक पर चर्चा करते हुए माकपा की वृंदा करात ने कहा कि , "इस क़ानून के बनने के साथ ही भारत में स्थिति बदलेगी क्योंकि यहां की महिलाएं अब भी सांस्कृतिक पिंजरे में क़ैद हैं. संस्कृति और परंपरा के नाम पर हमें हर रोज़ संघर्ष करना पड़ता है."

जेडीयू के शिवानंद तिवारी ने कहा कि "मुसलमानों के मन में ये आशंका है कि उन्हें उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है, उन्हें लगता है कि महिलाओं का आरक्षण होने से मुसलमान सांसदों की संख्या और कम हो जाएगी." बसपा के सतीश मिश्रा ने भी कहा कि मौजूदा रूप में इस बिल का समर्थन नहीं किया जा सकता है. उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपील की कि महिलाओं के लिए सीधे 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की जानी चाहिए.

इस मुद्दे पर कांग्रेस की नेता जयंति नटराजन ने कहा कि जो लोग दलितों के आरक्षण के नाम पर इस बिल का विरोध कर रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि दलितों को पहले से ही आरक्षण मिला हुआ है..

आज राज्यसभा में इस विधेयक के पास होने के बाद अब इसे लोकसभा में और फिर अलग-अलग राज्यों की कम से कम 15 विधानसभाओं में भी पारित करना होगा.

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