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औरतें बच्चे पैदा करें, राजनीति नहीं

औरतें बच्चे पैदा करें, राजनीति नहीं

लखनऊ, 13 मार्च 20100


शिया धर्मगुरु कल्बे जव्वाद ने महिलाओं को राजनीति करने के बजाय बच्चे पैदा करने की सलाह देकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. इलाहाबाद में धर्मगुरुओं के एक सम्मेलन में जव्वाद ने कहा कि महिलाओं को अल्लाह ने जिस काम के लिये पैदा किया है, उसको अंजाम दें. लीडरी करना उसका काम नहीं है, लीडर पैदा करना उसका काम है.

ज्ञात रहे कि एक दिन पहले ही कुछ हिंदु धार्मिक नेताओं ने फरमान जारी किया है कि हिंदू महिलायें अकेले मंदिर न जायें.अब शिया धर्मगुरु कल्बे जव्वाद के बयान के बाद यह माना जाने लगा है कि महिला आरक्षण विधेयक धार्मिक नेताओं को रास नहीं आया है.

कल्बे जव्वाद ने कहा कि “ महिलाएं घुड़सवारी करने, बंदूक चलाने या रैलियों में भाषण देने के लिए नहीं बनी हैं. अगर मां संसद में जाएंगी, तो बच्चों की देखभाल कौन करेगा.” उन्होंने कहा कि जेहाद शब्द की गलत व्याख्या की जा रही है. प्यासे को पानी और भूखे को खाना खिलाना भी जेहाद है. अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रख दूसरों की मदद करना भी जेहाद है. जेहाद का दहशतगर्दी से कोई रिश्ता नहीं है, जो दहशतगर्द हैं वह मुसलमान हो ही नहीं सकता.

इस बयान के अलावा लखनऊ में उन्होंने अपनी राय दी कि ईरान में पर्दे में ही औरतें पार्लियामेंट में रहती हैं लेकिन हिंदुस्तान में ये नामुमकिन है.

गौरतलब है कि एक दिन पहले ही उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े मदरसे नदवा-उल-उलेमा के प्रमुख मौलाना सर्रदुर रहमान आजमी नदवी ने भी इसी अंदाज में कहा था कि इस्लाम में महिलाओं को सिर्फ घर में रहकर परिवार और बच्चों के देखभाल करने को कहा गया है। उन्हें पढ़ने-लिखने और देश सेवा का अधिकार जरूर दिया गया है लेकिन उन्हें इस बात को भी ध्यान में रखना चाहिए कि इस्लाम सार्वजनिक तौर पर भाषण देने की इजाजत नहीं देता.

देवबंद दारूल उलूम ने भी राजनीति में जाने की इच्छुक महिलाओं के गैर इस्लामिक व्यवहार पर सज़ा देने की बात कही है.
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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

अरुण देव (www.samvadi.blogspot.com) नजीबाबाद

 
 मानवता और बराबरी के खिलाफ इस तरह के बयानबाजी करने वालो को सजा मिलनी चहिये
न की अपने हक के लिए लडने वाली औरतो को.
 
   
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