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दुनिया के एक तिहाई गरीब भारतीय

नई दिल्ली. 16 जुलाई 2013

गरीब


संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में दुनिया के सबसे ज्यादा गरीब रहते हैं. बुधवार को यहां जारी रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के समस्त निर्धनतम लोगों का 32.9 फीसदी हिस्सा भारत में रहता है. इसका अर्थ ये हुआ कि दुनिया का हर तीसरा गरीब भारत में रहता है. यह अनुपात चीन, नाइजीरिया और बांग्लादेश के अनुपात से भी ज्यादा है.

संयुक्त राष्ट्र की सहास्त्राब्दि विकास लक्ष्य रिपोर्ट 2014 में कहा गया है कि दक्षिण पूर्वी एशिया में गरीबी दर 1990 के 45 फीसदी से घटकर 2010 में 14 फीसदी रह गई है. फिर भी इस क्षेत्र में व्यापक स्तर पर गरीबी फैली हुई है.

इसी रिपोर्ट के अनुसार बाल मृत्यु दर भी भारत में सर्वाधिक है. यहां 2012 में 14 लाख बच्चों की मौत पांच वर्ष की अवस्था से पहले हो गई. इसके अलावा इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि भारत में 60 फीसदी लोग अभी भी खुले में शौच करने को मजबूर है.
रिपोर्ट जारी करते हुए भारत में संयुक्त राष्ट्र की स्थानीय समन्वयक लिज ग्रैंड ने कहा, "वैश्विक विकास में भारत की भूमिका दुनिया में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है. वैश्विक स्तर पर सहस्राब्दि लक्ष्य तब तक हासिल नहीं हो सकते, जब तक उन्हें यहां हासिल नहीं किया जाता."

उल्लेखनीय है कि सन 2000 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित सहस्त्राब्दि सम्मेलन में दुनिया भर के देशों ने 2015 तक के लिए गरीबी, भूख, लैंगिक समानता, शिक्षा और पर्यावरण जैसे मुद्दों से संबंधित आठ लक्ष्य तय किए थे. इसी विषय पर ये रिपोर्ट तैयार की गई है.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

BHARAT YADAV [] indore - 2014-07-17 07:06:58

 
  hum kisi bhi party ya samaj ka nam nahi lena chahte hai hame hamari loktantrik parampara par atut vishwas hai hamara kahana ye hai ki koi bhi sarkar aati hai to un annath garib bachho par koi kuch bhi nahi bolta hai sabhi party ko apani vote ki chinta rahti hai wo bechare annath bachhe sadak per dar dar ki thokre khate hai bhukho jivan bitate hai rahne ke liye ghar nahi khane ke liye do vakt ki roti nahi hai in becharo ki kya galti hai ye to ek abodh balak hai lekin koi bhi pary ki ajende me is mudde ke liye jagah nahi hai sabhi apni apni roti sekate hai mujhe to bas itna hi kahna hai mai to akele koi samaj to sudhar nahi sakta hu apni bat sirf kah sakta hu dhanyavad  
   
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