पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

भीड़ के ढांचे का सच खुल चुका

रिकॉर्ड फसल लेकिन किसान बेहाल

मधुमेह की महामारी कीटनाशक के कारण?

अंतिम सांसे लेता वामपंथ

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

भीड़ के ढांचे का सच खुल चुका

रिकॉर्ड फसल लेकिन किसान बेहाल

अंतिम सांसे लेता वामपंथ

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
 पहला पन्ना > राजनीति > दिल्ली Print | Send to Friend | Share This 

सांप्रदायिक हिंसा पर कानून इसी वर्ष

सांप्रदायिक हिंसा पर कानून इसी वर्ष

नई दिल्ली, 31 मार्च 2010


केन्द्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि सरकार अल्पसंख्यकों के हितों की पूरी रक्षा के लिये प्रतिबद्ध है और साम्प्रदायिक हिंसा पर विधेयक के इस वर्ष के अंत तक कानून बन जाने की संभावना है.

राज्य अल्पसंख्यक आयोगों के राष्ट्रीय सम्मेलन का उदघाटन करते हुए कहा पी चिदंबरम ने कहा कि साम्प्रदायिक दंगों को रोकना सरकार की सबसे बड़ी चिंता है. इस मकसद से बनाए गए साम्प्रदायिक हिंसा रोकथाम और प्रभावितों का पुनर्वास विधेयक को संशोधित रूप में राज्यसभा में फ़िर से पेश किया जाएगा. वर्ष के अंत तक इसके कानून बन जाने की संभावना है.

श्री चिदंबरम ने कहा कि अक्सर छोटी- छोटी बातों पर होने वाले साम्प्रदायिक दंगों से अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना और समाज में विभाजन बढ़ता है. इस विभाजन को खत्म करने के लिए ठोस सरकारी उपायों के अलावा समाज में आपसी समझबूझ बढ़ाने की भी जरूरत है. उन्होंने कहा कि इस देश की विविधता और बहुलवाद ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है.

गृहमंत्री ने कहा कि देश की 18 प्रतिशत से अधिक आबादी अल्पसंख्यकों की है. सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उन्हें भी विकास का पूरा फ़ायदा मिले. अल्पसंख्यकों के लिए प्रधानमंत्री का 15 सूत्री कार्यक्रम इस दिशा में उठाया गया ठोस कदम है.
सभी प्रतिक्रियाएँ पढ़ें
 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

radha (radhavin2006@gmail.com) r.k.puram new delhi

 
 अगर चिदंबरम जी की कथनी, करनी के रुप में लागू हुई तो शायद इस देश में आये दिन हो रहे सांप्रदायिक झगड़ों पर कुछ लगाम लगे. लेकिन ऐसे हजारों नियम बने हुए हैं...करप्शन रोकने के लिये. जरुरत है तो उनको ठोस रुप से लागू करने की. उसके लिये क्या कोई प्रयास हो रहा है ? यह ज्यादा जरुरी है. 
   
[an error occurred while processing this directive]
 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in