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मंगल ग्रह पर उतरा मंगलयान

मंगल ग्रह पर पहुँचा मंगलयान

दिल्ली. 24 सितंबर 2014

मंगलयान


भारत ने अपने प्रथम प्रयास में ही 'मंगलयान' नामक अंतरिक्षयान को मंगल ग्रह की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर इतिहास रच दिया है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के इस मंगलयान मिशन (एमओएम) ने मंगल ग्रह तक पहुंचने के लिए नौ महीनों में 6.5 करोड़ किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय की है.

अभियान के नियंत्रण केंद्र के एक अधिकारी ने बताया, "अंतरिक्षयान (ऑर्बिटर) ने सुबह 7.55 बजे मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश किया और यह सतह से लगभग 515 किलोमीटर दूर स्थापित हुआ."

इस मिशन की सफलता के साथ ही भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), मंगल ग्रह पर अपने मिशन में सफलता पाने वाली चौथी अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी बन गई है. यहीं नहीं भारत ऐसा करने वाला पहला एशियाई देश भी बन गया है. इसके पहले वर्ष 2011 में चीन का ऐसा ही एक मिशन असफल हो गया था. इसरो से पहले अमेरिका के राष्ट्रीय वैमानिकी एवं अंतरिक्ष प्रशासन (नासा), रूस की रसियन फेडरल स्पेस एजेंसी (आरएफएसए) और यूरोप की यूरोपियन स्पेस एजेंसी सफलतापूर्वक मंगल ग्रह पर पहुंच चुके हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने इस उपलब्धि पर भारतीय अंतरिक्ष अुनसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों को हार्दिक बधाई दते हुए कहा कि इस उपलब्धि को इतिहास में मील का पत्थर कहा जाएगा. वहीं राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सफलता को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि मंगल मिशन की सफलता हमारे वैज्ञानिकों को अधिक से अधिक प्रगति के लिए प्रेरित करेगी.

मंगलयान के मंगल की कक्षा में प्रवेश कराने की अंतिम प्रक्रिया तड़के 4.17 बजे से शुरू हुई, जब अंतरिक्षयान ने रेडियो सिग्नल प्राप्त करने और इसके उत्सर्जन के लिए मीडियम गेन एंटीना से जुड़ गया. सुबह 6.57 बजे मंगल ग्रह की दिशा में घूमने के बाद मंगल की कक्षा में स्थापति होने के लिए मंगलयान का मुख्य इंजन सुबह 7.17 बजे चालू हुआ. इस महत्वपूर्ण अभियान के दौरान, मंगल ग्रह पर सुबह 7.12 बजे से अंधेरा शुरू हुआ. मंगलयान को मंगल की कक्षा में प्रवेश कराने के लिए मुख्य इंजन का 440 न्यूटन लिक्विड अपोजी मोटर (एलएएम) सुबह 7.30 बजे चालू हुआ और सुबह 7.54 तक यानी 24 मिनट तक चलता रहा.

475 किलोग्राम वजनी मंगलयान में लगे पांच उपकरण मंगल ग्रह पर जीवन के लिए जरूरी तत्वों की तलाश में मंगल की सतह, उसकी खनिज संरचना का अध्ययन करेंगे और मीथेन गैस के लिए मंगल के वातावरण का स्कैन करेंगे. यह महत्वाकांक्षी मिशन पांच नवंबर, 2013 को बंगाल की खाड़ी में स्थित द्वीप, श्रीहरिकोटा से लांच किया गया था, जिस पर 450 करोड़ रुपये की लागत आई है.

गौरतलब है कि मंगल ग्रह, सौर मंडल में दूसरी सबसे छोटी खगोलीय संरचना है. इस ग्रह पर लौह ऑक्साइड बहुतायत में है, जिस कारण से इसका सतह लाल है. मंगल अपनी एक परिक्रमा पूरी करने में 24 घंटे 37 मिनट का समय लेता है. धरती को सूर्य की परिक्रमा करने में 365 दिन लगते हैं, जबकि मंगल को सूर्य की परिक्रमा में 687 दिन लगते हैं.


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