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मलाला-सत्यार्थी को नोबेल शांति पुरस्कार

मलाला-सत्यार्थी को नोबेल शांति पुरस्कार

नई दिल्ली. 10 अक्टूबर 2014

मलाला-कैलाश

युवा मानवाधिकार कार्यकर्ता मलाला युसुफज़ई और बाल अधिकार के क्षेत्र में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी को संयुक्त रूप से शांति के लिए नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा की गई है.

नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर कहा कि वर्ष 2014 का शांति के लिए नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से कैलाश सत्यार्थी और मलाला यूसुफजई को बच्चों एवं युवाओं के दमन के खिलाफ और बच्चों की शिक्षा की दिशा में काम करने के लिए दिया गया है.

सत्यार्थी भारत में गैर सरकारी संगठन 'बचपन बचाओ आंदोलन' का संचालन करते हैं और बाल अधिकार, खासकर बंधुआ मजदूरी के खिलाफ काम करते आए हैं. वहीं मलाला युसुफज़ई पाकिस्तान और विश्वभर में लड़कियों की शिक्षा के अधिकार के लिए आवाज़ उठाती रही है.

लड़कियों के लिए शिक्षा की वकालत करने के चलते मलाला को तालिबानी आतंकियों ने अक्टूबर 2012 में पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर इलाके में स्कूल से घर जाते समय गोली मार दी थी. हमले के बाद उसे विशेष चिकित्सा के लिए ब्रिटेन भेजा गया था जिसके बाद से वे वहीं रहती हैं.

मलाला के बारे में कमेटी ने कहा, “लड़कियों की शिक्षा के अधिकार के लिए मलाला ने कई वर्षो तक संघर्ष किया है और उदाहरण पेश किया है कि बच्चे और युवा अपनी स्थिति में सुधार के लिए खुद कोशिश कर कामयाब हो सकते हैं." बयान के मुताबिक, "ऐसा उसने बेहद खतरनाक स्थितियों में किया है. वीरतापूर्वक संघर्ष के द्वारा वह लड़कियों की शिक्षा के अधिकार की प्रमुख प्रवक्ता बन गई."

कमेटी के मुताबिक, एक हिंदू और एक मुस्लिम, एक हिंदुस्तानी और एक पाकिस्तानी के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों शिक्षा के अधिकार के लिए और आतंकवाद के खिलाफ समान संघर्ष में शामिल हुए.


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