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सिखों को मुआवजे पर आयोग सख्त

सिखों को मुआवजे पर आयोग सख्त

नई दिल्ली. 7 नवंबर 2014
 

निर्वाचन आयोग

निर्वाचन आयोग ने 1984 के सिख विरोधी दंगा पीड़ितों को मुआवजा देने के मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय की खिंचाई करते हुए उससे पूछा है कि अगर इस संबंध में कोई निर्णय नहीं किया गया था, जैसा सरकार ने दावा किया है, तो उसने मीडिया में आई खबरों का खंडन क्यों नहीं किया?

आयोग ने सरकार को इस मामले में फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसी घटना दोबारा नहीं होनी चाहिए. आयोग ने कहा कि सरकार के इस कदम से आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन हुआ.

आयोग ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को लिखे एक पत्र में कहा है कि सरकार की ओर से आए जवाब में कहा गया है कि मुआवजा बढ़ाने के संबंध में कोई फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन सरकार का यह कथन सही नहीं है क्योंकि आयोग ने मीडिया में इस तरह की कोई खबर नहीं देखी है. इसमें यह भी लिखा है कि इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि यह खबर मतदाताओं पर सुपस्पष्ट प्रभाव छोड़ने में सफल रही है.

आयोग ने कहा कि तीन सीटों पर उपचुनाव के मद्देनजर दिल्ली में आदर्श आचार संहिता लागू थी, और भाजपा ने ऐसा कर मतदाताओं के मन को बदलने के लिए इस तरह की खबर फैलाई. हालांकि बाद में इसे रद्द कर दिया गया.  पत्र में कहा गया है, "आयोग इस बात से आश्वस्त होना चाहेगा कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं नहीं होंगी."

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर को घोषणा की थी कि वह 1984 के सिख विरोधी दंगों में मारे गए 3,325 लोगों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा देगी.
 


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