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नसंबदी कराने गई 11 महिलाओं की मृत्यु

नसंबदी कराने गई 11 महिलाओं की मृत्यु

बिलासपुर. 12 नवंबर 2014
 

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर से 10 किलोमीटर दूर स्थित पेंडारी गांव के नेमिचंद अस्पताल लगे एक शिविर में नसबंदी में जटिलता उत्पन्न होने से कम से कम 11 महिलाओं का मृत्यु हो गई है जबकि 32 की हालत अभी भी भी गंभीर बनी हुई है.

राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने मंगलवार को अस्पताल का दौरा किया और जाँच बैठते हुए मृतकों को चार-चार लाख रुपये मुआवजा और गंभीर रूप से बीमार महिलाओं को 50 हजार रुपये बतौर सहायता राशि दिए जाने की घोषणा की है. मुख्यमंत्री ने इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल का दोष होने से इंकार किया और लापरवाही के आरोप में तीन डॉक्टरों को निलंबित कर दिया है.

गौरतलब है कि शनिवार को बिलासपुर से 10 किलोमीटर दूर पेंडारी गांव के नेमिचंद अस्पताल में लगे नसबंदी शिविर में शनिवार को 83 महिलाओं की नसबंदी की गई थी. शिविर में जिला अस्पताल के डॉ. आर.के. गुप्ता, डॉ. के.के. ध्रुव व डॉ. एम. निखटा ने लेप्रोस्कोपी पद्धति से ऑपरेशन किया और चंद घंटे बाद सभी महिलाओं को छुट्टी दे दी. महिलाएं अपने-अपने घरों तक पहुंची तो एक-एक कर सभी की तबीयत बिगड़ने लगी.

रविवार को उन्हें उल्टियां आने लगीं. हालत बिगड़ती देख उन्होंने स्थानीय स्तर पर डॉक्टरों से संपर्क किया. सोमवार को इन महिलाओं की हालत और बिगड़ गई.

सोमवार को एक महिला की मौत तो उस समय हुई, जब जिला कलेक्टर अस्पताल में आकर पीड़ितों का हालचाल जान रहे थे इसके बाद आंकड़ा बढ़ता गया. मंगलवार सुबह तक मरने वाली महिलाओं की संख्या आठ हो गई और बाद में 11 हो गई. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिला अस्पताल, सिम्स और अपोलो में अभी भी 56 महिलाएं भर्ती हैं. इनमें से 32 की हालत गंभीर बताई जा रही है.

इससे पहले, सोमवार देर रात स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल सिम्स में पीड़ितों को देखने पहुंचे तो वहां लोगों ने जोरदार हंगामा किया. स्वास्थ्य मंत्री ने नसबंदी ऑपरेशन करने वाले डॉ. आर.के. गुप्ता सहित तीन डॉक्टरों को निलंबित करने का आदेश दिया. डॉ. गुप्ता को इसी वर्ष 26 जनवरी को 50 हजार ऑपरेशन का लक्ष्य पूरा करने पर पुरस्कृत किया गया था.

घटना के बाद पूरे प्रदेश में तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है. बिलासपुर अस्पताल में मृत महिलाओं के परिजनों सहित कांग्रेस कार्यकर्ता राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं. इससे पहले भी यहां के एक सरकारी शिविर में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद दर्जनों लोगों की आंखें चली गई थीं.