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छत्तीसगढ़: दवाओं में थे जहरीले तत्व

छत्तीसगढ़: दवाओं में थे जहरीले तत्व

बिलासपुर. 15 नवंबर 2014
 

बिलासपुर मौतें

बिलासपुर जिले के पेंडारी में नसबंदी ऑपरेशन के बाद 13 महिलाओं की मृत्यु के मामले में राज्य के स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने खुलासा किया है कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर सिप्रोसिन में चूहामार दवा मिली होने की पुष्टि हुई है. इसी रिपोर्ट के आधार पर महावर फार्मा कंपनी की 43 लाख 34 हजार टैबलेट जब्त की गई है.

इस बारे में जानकारी देते हुए डॉ. शुक्ला ने पत्रकारों से कहा कि पेंडारी और गौरेला के नसबंदी शिविरों में ऑपरेशन के बाद महिलाओं को सिप्रोसिन 500 एमजी टैबलेट भी दिया गया था.

उन्होंने बताया कि जांच में यह सामने आया है कि सिप्रोसिन में जिंक फास्फाइड की ज्यादा मात्रा मिली हुई है. जिंक फास्फाइड का उपयोग चूहे मारने की दवा में किया जाता है. इसलिए प्रथम दृष्टया कहा जा सकता है कि जिंक फास्फाइड के कारण महिलाओं की हालत बिगड़ गई.

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा मेसर्स महावर फार्मा प्राइवेट लिमिटेड (रायपुर) द्वारा निर्मित सभी प्रकार की दवाओं की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और आम जनता से अपील की गई है कि कोई भी व्यक्ति महावर फार्मा की किसी भी प्रकार की दवा का सेवन न करें.

वैसे यह गौरतलब है कि महावर फार्मा को दिसंबर, 2010 में मानक स्तर के विटामिन बी कॉम्प्लेक्स न बनाने पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा कारण बताओ नोटिस दिया गया था. वहीं जून, 2011 में इन्हें 90 दिन के लिए रिएक्टिव प्लस नाम की दवा बनाने से रोक दिया गया था.

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस कंपनी पर अगस्त, 2011 में भी रिएक्टिव प्लस बनाने पर ही इन पर छह महीने की पाबंदी लगी थी. नवंबर, 2011 में एक आयरन सिरप में गड़बड़ी की वजह से इन पर फिर 90 दिन की पाबंदी ल


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