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सतही है मोदी-ओबामा की दोस्ती

सतही है मोदी-ओबामा की दोस्ती

नई दिल्ली. 26 जनवरी 2014. बीबीसी
 

मोदी ओबामा

चीनी विशेषज्ञ और अखबार मानते हैं कि ओबामा के दौरे का मकसद भारत को चीन के खिलाफ इस्तेमाल करने की एक और कोशिश है. चीनी सरकार के अख़बार ग्लोबल टाइम्स के एक लेख में भारत और चीन को ये कहते हुए चेतावनी दी गई है कि "वे पश्चिम के बिछाए जाल में न फंसे."

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है - “नई दिल्ली में भारत के प्रधानमंत्री और अमरीकी राष्ट्रपति के एक दूसरे को गले मिलने की घटना को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाने के पीछे मीडिया की वही पुरानी घिसी-पिटी मानसिकता नजर आती है.”

लेख कहता है,“बंधी बंधाई लीक पर सोचने का एक चलन बन गया है जिसे पश्चिम खूब प्रचारित कर रहा है. साफ है कि इसके पीछे उसका मकसद चीनी ड्रैगन और भारतीय हाथी को एक दूसरे का चिर-परिचित और स्थाई प्रतिद्वंद्वी बताना है.”
ग्लोबल टाइम्स के अनुसार चीन और भारत ये नहीं चाहते लेकिन पश्चिमी प्रभाव में भारत फिसलता चला जा रहा है.

अन्य जगह चीनी मीडिया में कहा गया है कि मोदी और ओबामा केवल बाहरी तौर पर एक साथ हैं क्योंकि दोनों नेताओं के बीच अभी कई मुद्दों पर भारी मतभेद बरकरार हैं.

शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने अमरीका और भारते के बीच उभरे कूटनीतिक मतभेद को याद करते हुए मोदी और ओबामा की दोस्ती को और गर्मजोशी को 'सतही' बताया है और कहा है कि दोनों देश के दिग्गजों के बीच भारी मतभेद हैं. एजेंसी का कहना है, “ये एक सतही मेल-मिलाप है जिसे एक सौदे की तरह देखा जाना चाहिए क्योंकि ओबामा को भारत की ज़रूरत है ताकि अमरीकी राजनीति में वे अपनी उपलब्धियां गिना सकें."

अन्य जगहों पर चीनी मीडिया ने ओबामा मोदी की मुलाकात के बीच आने वाले मुद्दे गिनाते हुए - पर्यावरण, कृषि संबंधी विवाद और परमाणु ऊर्जा सहयोग की बात की है.

 


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