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आप ने घोषणापत्र जारी किया

आप ने घोषणापत्र जारी किया

नई दिल्ली. 31 जनवरी 2015
 

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आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार को अपना घोषणा-पत्र जारी किया जिसमें सत्ता में आने पर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने, व्यापार के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने और बिजली की दरें कम करने का वादा किया गया है. इसमें आप ने सत्ता में आने पर जनलोकपाल एवं स्वराज विधेयकों को पारित कराना भी अपनी प्राथमिकता बताया है.

आप ने अपने घोषणा-पत्र में महिला सुरक्षा के मुद्दे को भी प्रमुखता से शामिल किया है. घोषणा-पत्र में महिलाओं की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने, 20 नए कॉलेज खोलने, सस्ती दर पर पेयजल उपलब्ध कराने और नि:शुल्क वाई-फाई जोन बनाने के वादे भी किए गए हैं.

दिल्ली में अधिक रोजगार सृजन करने की अपनी योजना के बारे में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "हम दिल्ली को व्यापार, शिक्षा, पर्यटन तथा सेवा केंद्र के रूप में विकसित करना चाहते हैं. इससे दिल्ली में रोजगार के अधिक अवसर सृजित करने में मदद मिलेगी." उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूं कि हर महिला सुरक्षित महसूस करे. महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राजधानी में 10 लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे. सभी सरकारी बसों में सुरक्षा गार्ड तैनात किए जाएंगे."

केजरीवाल ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा बिजली कंपनियों का ऑडिट करवाए जाने की बात भी कही. उन्होंने कहा, "अन्य पार्टियों की तरह हमारा बिजली कंपनियों से कोई हित नहीं जुड़ा है. हम इन बिजली कंपनियों का लेखा परीक्षण करवाएंगे और उसके आधार पर ही दरें तय करेंगे."

उन्होंने कहा कि घोषणा-पत्र में शामिल 70 सूत्री कार्य योजना को सत्ता में आने के तुरंत बाद लागू किया जाएगा, जैसा कि पार्टी ने अपने 49 दिन के पिछले कार्यकाल के दौरान किया था. बिजली के बिल में 50 फीसदी की कमी की जाएगी.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को आड़े हाथों लेते हुए केजरीवाल ने कहा कि यह पार्टी इसलिए घोषणा-पत्र नहीं जारी कर रही, क्योंकि इसने लोकसभा चुनाव के समय जो वादे किए थे, उन्हें अब तक पूरा नहीं किया. गौरतलब है कि भाजपा ने घोषणा की है कि वह दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए घोषणा-पत्र जारी नहीं करेगी, बल्कि 'विजन डॉक्यूमेंट' जारी करेगी.

कांग्रेस के संबंध में आप नेता ने कहा कि 15 साल उनका शासन रहा. इस दौरान उन्होंने तीन घोषणा-पत्र जारी किए, लेकिन यह दुखद है कि इनमें किए गए अधिकांश वादों को पूरा नहीं किया गया.