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हाशिमपुरा जनसंहार के सभी आरोपी बरी

हाशिमपुरा जनसंहार के सभी आरोपी बरी

नई दिल्ली.  21 मार्च 2015
 

फैसला

मेरठ के हाशिमपुरा इलाके में 22 मई 1987 में हुए 42 लोगों के जनसंहार के मामले में प्रांतीय सशस्त्र पैदल सेना (पीएसी) के 16 कर्मचारियों को राहत मिली है. दिल्ली के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजय जिंदल ने पीएसी के 16 कर्मचारियों को हत्या, हत्या के प्रयास, सबूतों से छेड़छाड़ तथा साजिश के आरोपों से बरी कर दिया

इस मामले में पीएसी के सुरेश चंद शर्मा, निरंजन लाल, कमल सिंह, रामबीर सिंह, समी उल्लाह, महेश प्रसाद, जयपाल सिंह, राम ध्यान, श्रवण कुमार, लीला धर, हमबीर सिंह, कुंवर पजल सिंह, बुद्धा सिंह, बुद्धि सिंह, मोखम सिंह तथा बसंत बल्लभ आरोपों का सामना कर रहे थे.

अदालत ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए कहा कि सबूतों की कमी के कारण मामले में उनकी संलिप्तता साबित नहीं हुई है. अदालत ने कहा कि चूंकि आरोपियों को मामले से रिहा कर दिया गया है, इसलिए पीड़ितों व प्रभावितों का पुनर्वास किया जाना चाहिए.

यहां की एक सत्र अदालत ने जुलाई 2006 में आरोपियों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, सबूतों से छेड़छाड़ तथा साजिश का आरोप तय किया था. इस मामले में कुल 19 लोग आरोपी बनाए गए थे, जिनमें से तीन की सुनवाई के दौरान मौत हो गई.

ये हत्याएं कथित तौर पर मेरठ में दंगे के दौरान हुईं, जिसमें पीएसी की 41वीं बटालियन द्वारा तलाशी अभियान के दौरान पीड़ितों को हाशिमपुरा मोहल्ले से उठाया गया था.

मामले में आरोप पत्र साल 1996 में गाजियाबाद के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष दाखिल किया गया था. जनसंहार के पीड़ितों की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को सितंबर 2002 में दिल्ली स्थानांतरित कर दिया.