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सत्यम घोटाला: राजू को सात साल कैद

सत्यम घोटाला: राजू को सात साल कैद

नई दिल्ली. 8 अप्रैल 2015
 

रामालिंगा राजू

सीबीआई की एक विशेष अदालत ने गुरुवार को सत्यम घोटाले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए संस्थापक बी. रामालिंगा राजू, उनके दो भाइयों और सात अन्य को सात साल कैद की सजा सुना दी.

विशेष अदालत के विशेष न्यायधीश बी.वी.एल.एन. चक्रवर्ती ने सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज लिमिटेड के संस्थापक एवं पूर्व अध्यक्ष 60 वर्षीय रामालिंगा राजू और उनके भाई बी. रामा राजू पर पांच करोड़ रुपये (प्रत्येक) और शेष आठ अभियुक्तों पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया है. सभी आरोपियों को दो से सात साल तक की सजा सुनाई गई थी, लेकिन सभी सजाएं एक साथ चलेंगी. इसी कारण से उन्हें अधिकतम सात साल की सजा काटनी होगी.

रामालिंगा राजू और उनके भाई बी. रामा राजू सहित सजा याफ्ता आठ लोगों में रामालिंगा के दूसरे भाई बी. सूर्य नारायण राजू, सत्यम के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी वदलामणि श्रीनिवास, प्राइसवाटरहाउसकूपर्स के पूर्व ऑडिटर सुब्रमणि गोपालकृष्णन और टी श्रीनिवास तथा पूर्व कर्मचारी जी. रामकृष्ण, डी. वेंकटपति राजू और श्रीशैलम एवं सत्यम के पूर्व आंतरिक मुख्य ऑडिटर वी.एस. प्रभाकर गुप्ता शामिल हैं.

सीबीआई अदालत दोपहर को सजा सुनाई. इससे कुछ ही घंटे पहले उन्होंने न्यायाधीश ने उन्हें मामले में दोषी ठहराया था.

न्यायाधीश ने दोषियों की याचिका स्वीकार नहीं की, जिसमें दोषियों ने अपनी उम्र, स्वास्थ्य और पारिवारिक समस्या का हवाला देते हुए सजा में नरमी बरतने का अनुरोध किया था. दोषियों ने अदालत से कहा कि उन्होंने पहले ही दो साल से अधिक अवधि जेल में बिता ली है. रामालिंगा राजू ने पूर्व में किए गए सामाजिक कार्यो के आधार पर भी सजा में नरमी बरते जाने का आग्रह किया.

सीबीआई ने हालांकि कहा कि यह कंपनी जगत का सबसे बड़ा घोटाला था और इससे निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है इसलिए दोषियों को अधिकतम सजा दी जाए.

सत्यम घोटला सात जनवरी, 2009 को प्रकाश में आया था, जब रामालिंगा राजू ने स्वीकार किया था कि कंपनी कई सालों से अपना मुनाफा कई करोड़ रुपये बढ़ा-चढ़ा कर दिखा रही थी.

सीबीआई ने फरवरी, 2009 में इसकी जांच शुरू की थी. अपनी जांच में इसने बताया था कि इस घोटाले में शेयरधारकों को 14,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. सीबीआई ने रामालिंगा पर सत्यम से अपने परिवार की हिस्सेदारी बेचकर 2,5000 करोड़ रुपये का लाभ कमाने का भी आरोप लगाया था. रामालिंगा पर कई झूठी कंपनियां बनाकर इनके नाम जमीन खरीदने का भी आरोप था. आंध्र प्रदेश पुलिस ने उन्हें नौ जनवरी, 2009 को गिरफ्तार किया था.

सीबीआई ने जांच के बाद रामालिंगा तथा अन्य आरोपियों के खिलाफ तीन आरोप पत्र दाखिल की थीं, जिसमें उन पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, जालसाजी, खातों में हेराफेरी और विश्वासघात का आरोप लगाया गया था.

इस मामले में रामालिंगा राजू करीब 32 महीने जेल में रह चुके हैं. वर्ष 2011 में जमानत पर रिहा होने के बाद राजू ने अपने खिलाफ लगे सभी आरोंपों को झूठा बताया था. घोटाले के बाद एक सरकारी नीलामी में सत्यम कंप्यूटर्स को टेक महिंद्रा ने खरीद लिया था. महिंद्रा सत्यम बाद में टेक महिंद्रा में विलय हो गई थी.


 


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