पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति > Print | Share This  

बांग्लादेशी क्रिकेटर रुबेल हुसैन को जमानत

दुस्वपन बना अच्छे दिन का सपना: माकपा

नई दिल्ली. 21 मई 2015
 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अच्छे दिन का वादा अब भ्रम से दुस्वप्न में बदलता जा रहा है. मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने गुरुवार को एक संपादकीय में यह बात कही. पार्टी के मुखपत्र पीपुल्स डेमोक्रेसी में प्रकाशित संपादकीय के मुताबिक मोदी सरकार के एक साल के कार्यकाल में भारत दो भागों में बंटता दिखाई दिया है.

संपादकीय में पार्टी ने मोदी सरकार के उस दावे की भी खिल्ली उड़ाई जिसमें कहा गया है कि उसके एक साल के कार्यकाल में एक भी घोटाला सामने नहीं आया है.

पार्टी ने पूछा, "क्या किसी को संप्रग (संयुक्त प्रगतिशील सरकार) के कार्यकाल के पहले चार सालों का कोई घोटाला याद है? तेजी से अपने करीबियों के साथ पूंजीवाद की ओर बढ़ रही सरकार के इस दावे की सच्चाई समय बताएगा."

'तिहरा खतरा' नाम के इस संपादकीय में कहा गया है कि मोदी सरकार की छवि को इस तरह से चित्रित करने के ठोस प्रयास किए जा रहे हैं जैसे कि भारत का पुनरुत्थान करने में केवल वही सक्षम हैं.

संपादकीय के मुताबिक, वास्तव में सरकार आर्थिक सुधारों की नव-उदारवादी नीतियों को शुरू कर रही है, लगातार देश की धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक नींव पर हमला कर रही है और लोकतांत्रिक संस्थाओं को धीरे-धीरे खत्म करती जा रही है.

पार्टी ने संपादकीय में कहा, "हमारी अर्थव्यवस्था के सभी प्रमुख क्षेत्रों में अब अधिक से अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति दे दी गई है."

संपादकीय के मुताबिक, "तेजी से लाभ बढ़ाने के लिए अचल संपत्ति घरेलू और विदेशी कंपनियों को सौंपकर सरकार किसानों के विशाल वर्ग को बर्बाद करने के एजेंडे को बढ़ा रही है."

संपादकीय में कहा गया कि देश में कृषि संकट गहराया है और इससे किसानों की आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. श्रमिकों की स्थिति भी कुछ बेहतर नहीं है. वहीं दूसरी ओर पूंजीपति और अमीर होते जा रहे हैं. फोर्ब्स की 2014 में जारी सूची के मुताबिक भारत के 100 सबसे अमीर व्यक्ति अरबपति हैं. (एक अरब डॉलर करीब 6400 करोड़ रुपये होता है.)

संपादकीय के मुताबिक, "2011 में इसी सूची में भारत के अरबपतियों की संख्या 55 थी. इन 100 अरबपतियों की कुल संपत्ति 34,600 करोड़ डॉलर है."

 


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in