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जेसिका हत्याकांड में सजा बरकरार

जेसिका हत्याकांड में सजा बरकरार

नई दिल्ली. 19 अप्रैल 2010


उच्चतम न्यायालय ने जेसिका लाल हत्याकांड में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा सुनाये गये उम्रकैद के फैसले को बरकरार रखा है. अभियुक्तों के वकील राम जेठमलानी के तर्कों को खारिज करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा कि दोषियों को उच्चतम न्यायालय ने जो फैसला सुनाया है, उसे मीडिया के दबाव में सुनाया गया फैसला नहीं कहा जा सकता.

हरियाणा के पूर्व मंत्री विनोद शर्मा का पुत्र मनु शर्मा को जेसिका लाल की हत्या के मामले में जिला अदालत ने बरी कर दिया था, जिसके बाद उच्च न्यायालय ने इस मामले की दोबारा सुनवाई करते हुए अभियुक्त को उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

29 अप्रैल 1999 को जेसिका लाल की साउथ दिल्ली की कुतुब कोलोनेड स्थित टमरिंड कोर्ट कैफे रेस्तरां में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में मनु शर्मा सहित अन्य को आरोपी बनाया गया. निचली अदालत ने 21 फरवरी 2006 को मनु शर्मा को हत्या मामले में बरी कर दिया था.

बाद में दिल्ली पुलिस ने निचली अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी. उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को 18 दिसंबर 2006 को पलटते हुए मनु शर्मा को उम्रकैद की सजा सुनाई. उच्च न्यायालय इस मामले में विकास यादव और अमरजीत सिंह गिल को सबूत नष्ट करने का दोषी माना था. इस फैसले को मनु शर्मा ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी.

सोमवार को उच्चतम न्यायालय ने मनु शर्मा की सजा को बरकरार रखते हुए कहा कि निचली अदालतों में हुई कार्रवाई में तथ्यों की भारी उपेक्षा की गई है. इस केस में दो आरोपी विकास यादव और अमरजीत सिंग गिल की 4-4 साल की सजा को भी बरकरार रखा गया है.

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