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उपहार अग्निकांड मुकदमे में अंसल बंधुओं को राहत

उपहार अग्निकांड मुकदमे में अंसल बंधुओं को राहत

नई दिल्ली. 23 अप्रैल 2010

दिल्ली की एक अदालत ने उपहार सिनेमा अग्निकांड मामले में मुख्य अभियुक्त दोनों अंसल बंधुओं सुशील अंसल और गोपाल अंसल को जमानत दे दी. 13 जून 1997 को राजधानी के उपहार सिनेमा में लगी आग से 59 लोगों की जानें गई थीं. इस मामले में उपहार सिनेमा के मालिक अंसल बंधओं पर मुकदमा चला था. फिर इस मामले से संबंधित सबूतों को मिटाने के आरोप में अंसल बंधुओं ने अदालत के समक्ष माना था कि उन्होंने सुबूतों से छेड़छाड़ की है और आत्मसमर्पण किया था.

शुक्रवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए मेट्रोपॉलिटन मेजिस्ट्रेट गीतांजलि गोयल ने अंसल बंधुओं को एक लाख रुपए के निजी मुचलके पर जमानत देने का आदेश दिया. अंसल बंधुओं के साथ आत्मसमर्पण करने वाले चार अन्य आरोपियों एचएस पवार, अनूप सिंह, धमवीर मलहोत्रा और प्रेम प्रकाश बत्रा को भी अदालत ने निजी मुचलके पर जमानत दे दी है. अदालत ने इस मुकदमे की अगली सुनवाई के लिए 17 मई की तारीख निर्धारित की है.

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

shiv sharma () bastar

 
 अंसल बंधुओं की भूमिका पूरे मामले में साफ है. एक दिन यहां भी इंसाफ होगा जैसे जेसिका लाल हत्याकांड में अंततः इंसाफ हुआ है. दोनों ही कांड में दरअसल पीड़ितों ने संगठित होकर न्याय के लिए आर पार की लड़ाई लड़ी. आर पार की लड़ाई सिस्टम में रहकर भी, वैधानिक तरीके से लड़ी जा सकती है, जेसिका की बहन ने ये संभव कर दिखाया. बहुत पसीना बहा, आंसू बहे पर खून सिर्फ जेसिका का बहा. कहने के अर्थ है कि, आज के गांधीवादी तरीके से जीती हुई जंग है.

छोटी छोटी लड़ाई है, पर जीत बड़ी है. सबक है कि मनु शर्मा जैसा पहुँच वाला आदमी भी न्याय के आगे घुटनों के बल होगा, होना पड़ेगा. पर हां लड़ना होगा, जिंदा रहने के लिए अनिवार्य शर्त है. लड़ना होगा. तैय्यारी करनी होगी ऐसी पीढ़ी की जो अपने पक के लिए, सच के लिए लड़ सके. अब पुस्तकों में कुछ चैप्टर और जोड़े जाने चाहिए जिसमें आज के योद्धा हों.

हम लड़ेंगे साथी, हम लड़ेंगे उदास मौसम के खिलाफ, क्योंकि लड़े बगैर कुछ भी नहीं मिलता.
 
   
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