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फोन टेप किये जाने से भड़के नेता

फोन टेप किये जाने से भड़के नेता

नई दिल्ली. 24 अप्रैल 2010


बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार द्वारा कथित रुप से उनके टेलीफोन टेप कराये जाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है. उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार को इस मामले में स्पष्ट करना चाहिये कि क्या एक राज्य का मुख्यमंत्री देश की सुरक्षा के लिये इतना खतरनाक हो सकता है कि उसका फोन टेप कराने की जरुरत पड़े.

आउटलूक पत्रिका के ताज़ा अंक में नेताओं के फोन टेप किये जाने की खबर प्रकाशित होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में नीतीश कुमार ने कहा कि केंद्र की कांग्रेस सरकार उनके सरकारी फोन को टेप कर रही है, जो गैरकानूनी है. उन्होंने आपातकाल की याद दिलाते हुए कहा कि उस समय भी कांग्रेस ने इसी तरह लोकतंत्र की हत्या की कोशिश की थी. कांग्रेस एक बार फिर उसी रास्ते पर है.

इधर भाजपा ने भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार को इस मामले में जवाब देना चाहिए. भाजपा ने इस मुद्दे को संसद में भी उठाये जाने की बात कही है.

ज्ञात रहे कि आउवलुक पत्रिका के ताजा अंक में दावा किया गया है कि एक केन्द्रीय एजेंसी केन्द्रीय कृषिमंत्री शरद पवार, कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, माकपा महासचिव प्रकाश करात के फोन टेप करा रही थी.

आउटलुक में छपी खबर के मुताबिक इन सब नेताओं के फोन अलग-अलग वजहों से टैप करवाए गए. आउटलुक का दावा है कि केंद्रीय कृषि मंत्री और एनसीपी के बॉस शरद पवार का फोन टैप किया गया था. पवार ने विवादों से घिरे आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी से पिछले पखवाड़े फोन पर जो कुछ भी बातें की, सब यूपीए सरकार ने टैप करवाईं. पवार और मोदी की चोरी छिपे रिकॉर्ड की गई फोन पर बातचीत से आईपीएल टीमों की नीलामी का सच सामने आता है. उस बातचीत से नीलामी से जुड़ी अंदर की कहानी सामने आ गई है.

आउटलुक पत्रिका का दावा है कि यूपीए सरकार ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का फोन भी टैप करवाया गया. ये रिकॉर्डिंग फरवरी, 2007 में हुई. बताया जा रहा है कि इस रिकॉर्डिंग में दिग्विजय सिंह पंजाब के एक कांग्रेस नेता से कांग्रेस कार्यकारिणी चुनाव के बारे में बातचीत कर रहे हैं.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का फोन अक्टूबर 2007 में रिकॉर्ड किया गया, जब वो दिल्ली में थे और अपने एक साथी से केंद्र सरकार से और फंड लेने के तरीकों के बारे में बातें कर रहे थे. बातें कोसी नदी की परियोजनाओं की हो रही थी.

चौथे नेता सीपीएम महासचिव प्रकाश करात हैं. आउटलुक पत्रिका का दावा है कि यूपीए सरकार ने प्रकाश कारत का फोन जून 2008 में रिकॉर्ड करवाया था. कोशिश ये जानने की थी कि आखिर भारत-अमेरिका परमाणु करार पर विपक्ष क्या लाइन लेने जा रही है.