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चर्चा और बहस से जताएं असहमति: राष्ट्रपति

चर्चा और बहस से जताएं असहमति: राष्ट्रपति

नई दिल्ली. 16 नवंबर 2015
 

प्रणब मुखर्जी

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मीडिया से सार्वजनिक हितों की निगरानी करने वाले की भूमिका निभाने और उपेक्षित लोगों की आवाज बनने का आग्रह किया.  श्री मुखर्जी ने कहा कि भावनाओं को तर्क पर हावी नहीं होने देना चाहिए और असहमति को बहस और चर्चा से अभिव्यक्त करना चाहिए.

भारतीय प्रेस परिषद द्वारा आयोजित राष्ट्रीय प्रेस दिवस समारोह में राष्ट्रपति ने कहा कि पत्रकारों को बुराइयों और उन वंचनाओं को सामने लाना चाहिए, जिन्होंने आज भी बड़ी संख्या में लोगों को परेशान किया हुआ है.

मुखर्जी ने कहा, "मीडिया की शक्ति का इस्तेमाल हमारी नैतिक दिशा को दुरुस्त करने और उदारवाद, मानवतावाद और सार्वजनिक जीवन में शालीनता को बढ़ावा देने के लिए करना चाहिए. विचार स्वतंत्र होते हैं लेकिन तथ्य पवित्र."

उन्होंने कहा, "फैसला सुनाने में एहतियात बरतनी चाहिए, खासकर उन मामलों में जहां कानूनी प्रक्रिया का पूरा होना अभी बाकी हो. हमें नहीं भूलना चाहिए कि करियर और प्रतिष्ठा बनाने में सालों लग जाते हैं, लेकिन ध्वस्त होने में चंद मिनट."

इस साल के राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर विचार के केंद्र बिंदु का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, "कारटूनिस्ट अपने समय के मिजाज को पकड़ता है और उसकी कला ही यही है कि किसी को तकलीफ पहुंचाए बिना उस पर व्यंग्य किया जाए. कुछ ब्रश जो कर जाते हैं वह लंबे लेख नहीं कर पाते. भारतीय कार्टूनिस्टों के पितामह वी.शंकर से पंडित जवाहर लाल नेहरू कहा करते थे, 'मुझे छोड़ना मत, शंकर'."

राष्ट्रपति ने इस मौके पर पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार दिए.
 


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