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अपने भीतर की गंदगी साफ करें: राष्ट्रपति

अहमदाबाद. 1 दिसंबर 2015
 

प्रणब मुखर्जी

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को लोगों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि दूसरी गंदगी साफ करने से पहले समाज अपने भीतर की गंदगी साफ करे.

साबरमती आश्रम में यहां एक नए अभिलेखागार और अनुसंधान केंद्र का उद्घाटन करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, "भारत की असली गंदगी सड़कों पर नहीं, बल्कि हमारे मन में और समाज को 'हम और वे', 'शुद्ध और अशुद्ध' में बांटती सोच को त्यागने की अनिच्छा में है."

राष्ट्रपति, महात्मा गांधी द्वारा 1920 में स्थापित गुजरात विद्यापीठ के 62वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करने के लिए भी यहां आए हुए हैं.

राष्ट्रपति ने कहा, "हमें स्वच्छ भारत अभियान का स्वागत करना चाहिए और इस प्रशंसनीय कार्य को सफल बनाना चाहिए. हालांकि इसे मन को शुद्ध करने और इसके सभी पहलुओं में गांधीजी के सपने को पूरा करने के एक अधिक बड़े और तीव्र प्रयास की शुरुआत के रूप में भी देखा जाना चाहिए."

राष्ट्रपति ने कहा, "गांधीजी हमें बताते और डॉ बाबासाहेब अंबेडकर उनका समर्थन करते कि जब तक अस्पृश्यता कायम रहेगी और जब तक सिर पर मैला ढोने की अमानवीय प्रथा कायम रहेगी तब तक सही अर्थ में हमारा भारत स्वच्छ नहीं हो सकता."