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फोन टेपिंग पर संसद में हंगामा

फोन टेपिंग पर संसद में हंगामा

नई दिल्ली. 26 अप्रैल 2010


सरकार और विपक्ष के नेताओं के फोन टेप किये जाने के मुद्दे पर सोमवार को संसद की कार्रवाई शुरु होते ही जोरदार हंगामा हुआ. भाजपा और माकपा समेत दूसरे दलों ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से वक्तव्य की मांग करते हुए भारी शोर-शराबा किया. भारी शोर-शराबे के बीच लोकसभा को दोपहर तक स्थगित कर दिया गया.

भारतीय संसद


विपक्ष चाहता था कि प्रश्नकाल स्थगित करके इस विषय पर सरकार बात करे. हालांकि लोकसभा अध्यक्ष सुश्री मीरा कुमार इसे शून्यकाल में उठाये जाने के पक्ष में थीं. बाद में सदस्यों ने भारी शोर शराबा मचाया. इस मुद्दे पर एकजुट विपक्ष ने सरकार पर जम कर आरोप लगाये. भाजपा नेता लालकृष्ण अडवाणी ने आपातकाल की याद दिलाते हुए कहा कि हमने आपातकाल के 19 महीने भी देखे हैं और यह आपातकाल की तरह ही है. उन्होंने कहा कि यह अत्यंत गंभीर मामला है और इस पर प्रधानमंत्री को सदन में आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिये. उन्होंने भारतीय कानूनों का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह किसी का फोन टेप किया जाना गैरकानूनी है.

ज्ञात रहे कि आउवलुक पत्रिका के ताजा अंक में दावा किया गया है कि एक केन्द्रीय एजेंसी केन्द्रीय कृषिमंत्री शरद पवार, कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, माकपा महासचिव प्रकाश करात के फोन टेप करा रही थी.

आउटलुक में छपी खबर के मुताबिक इन सब नेताओं के फोन अलग-अलग वजहों से टैप करवाए गए. आउटलुक का दावा है कि केंद्रीय कृषि मंत्री और एनसीपी के बॉस शरद पवार का फोन टैप किया गया था. पवार ने विवादों से घिरे आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी से पिछले पखवाड़े फोन पर जो कुछ भी बातें की, सब यूपीए सरकार ने टैप करवाईं. पवार और मोदी की चोरी छिपे रिकॉर्ड की गई फोन पर बातचीत से आईपीएल टीमों की नीलामी का सच सामने आता है. उस बातचीत से नीलामी से जुड़ी अंदर की कहानी सामने आ गई है.

आउटलुक पत्रिका का दावा है कि यूपीए सरकार ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का फोन भी टैप करवाया गया. ये रिकॉर्डिंग फरवरी, 2007 में हुई. बताया जा रहा है कि इस रिकॉर्डिंग में दिग्विजय सिंह पंजाब के एक कांग्रेस नेता से कांग्रेस कार्यकारिणी चुनाव के बारे में बातचीत कर रहे हैं.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का फोन अक्टूबर 2007 में रिकॉर्ड किया गया, जब वो दिल्ली में थे और अपने एक साथी से केंद्र सरकार से और फंड लेने के तरीकों के बारे में बातें कर रहे थे. बातें कोसी नदी की परियोजनाओं की हो रही थी.

चौथे नेता सीपीएम महासचिव प्रकाश करात हैं. आउटलुक पत्रिका का दावा है कि यूपीए सरकार ने प्रकाश कारत का फोन जून 2008 में रिकॉर्ड करवाया था. कोशिश ये जानने की थी कि आखिर भारत-अमेरिका परमाणु करार पर विपक्ष क्या लाइन लेने जा रही है.


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