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रमन सिंह ने साधा दिग्विजय सिंह पर निशाना

रमन सिंह ने साधा दिग्विजय सिंह पर निशाना

रायपुर. 26 अप्रैल 2010


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह द्वारा नक्सल मुद्दे पर लिखे गये आलेख को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कड़ी आपत्ति दर्ज की है. दिग्विजय सिंह के ही तर्ज पर रमन सिंह ने एक लेख लिख कर दिग्विजय सिंह को चुनौती दी है कि वे जहां चाहें, नक्सल मुद्दे पर आमने-सामने बहस के लिये तैयार हैं. अपने लेख में रमन सिंह ने आरोप लगाया है कि दिग्विजय सिंह ने जानबूझकर पूर्वाग्रही तथा प्रपंचक लेख लिखकर बौद्घिक बेईमानी कापरिचय दिया है, जिसमें केवल तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा गया है.

रमन सिंह


रमन सिंह ने अपने लेख में लिखा है कि दिग्विजय सिंह सरीखे महत्वाकांक्षी नेता अपनी कारगुजारियों से संतुष्ट नहीं रहते. योजनाबद्घ रूप से मध्य प्रदेश और उसका हिस्सा रहे छत्तीसगढ़ का नाश करने के बाद अब वे दिल्ली में नए गुल खिला रहे हैं. अविभक्त राज्य के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय यहां अपनी प्रासंगिकता खो चुके हैं.

रमन सिंह के अनुसार छत्तीसगढ़ का जन्म ही पिछड़ेपन की पीड़ा से हुआ है. उस पिछड़ेपन को बढ़ाने में दिग्विजय सिंह की भूमिका षड्यंत्रकारी की रही है. छत्तीसगढ़ में स्थितियों की विकरालता के लिए तत्कालीन अविभक्त मध्यप्रदेश में विकास का अभाव और घोर प्रशासनिक उपेक्षा जिम्मेदार है. दिग्विजय ने छत्तीसगढ़ की सम्पदा का भरपूर दोहन किया और उसके एवज में इसे कुछ भी नहीं दिया.

अपने लेख में रमन सिंह ने कहा है कि दिग्विजय का सात वर्षों का कार्यकाल छत्तीसगढ़ के इतिहास का ‘काल युग’ माना जाता है. उनके कुशासन का फल मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ आज भी भोग रहे हैं. सामाजिक और आर्थिक ढांचे की घनघोर उपेक्षा की गई. उस समय जानकारी मिलती रहती थी कि नक्सली रफ्ता-रफ्ता अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार कर रहे हैं. तब दिग्विजय सरकार तंद्रा में पड़ी रही. पुलिस व्यवस्था को मजबूत बनाने का कोई प्रयास नहीं किया गया.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने अपने लेख में कहा है कि यदि उस दौरान नक्सलियों के विरुद्घ ठोस कार्रवाई की गई होती तो जवानों की शहादतों को रोका जा सकता था. विडंबना यह है कि बस्तर में नक्सल समस्या को विकराल बनाने में सबसे अधिक जिम्मेदार व्यक्ति ही अब उसके समाधान के लिए ’विकास‘ का सुझाव दे रहे हैं.

दिसंबर 1999 में बालाघाट में नक्सलियों द्वारा मध्यप्रदेश के परिवहन मंत्री लखीराम कांवरे की हत्या के समय दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्री होने को याद दिलाते हुए रमन सिंह ने अपने लेख में लिखा है कि नक्सलवाद को नियंत्रित किए बिना विकास की बात करना अत्यन्त जटिल समस्या का अतिसरलीकरण करना है. यह नक्सलवाद की गंभीर समस्या को पूर्वाग्रही चश्मे से देखना भी है.

रमन सिंह ने लेख में कहा है कि न तो इस जटिल समस्या का अतिसरलीकरण किया जाए और न ही संशय उत्पन्न करने वाली प्रतिक्रियाएं उछाली जाएं. नक्सलवाद से लड़ने के लिए आवश्यकता है कि एक सुविचारित बहुआयामी और स्पष्ट रणनीति की, जिसमें पुलिस कार्रवाई तथा सामाजिक, आर्थिक विकास समाहित हों. नक्सलवाद को हमने विकास विरोधी, जनविरोधी, जघन्य हिंसक रूप में देखा है. इस बारे में दिग्विजय सिंह जब भी और जहां भी चाहें मैं उनसे बातचीत या बहस के लिए तैयार हूं.

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

sunderlohia (lohiasunder2@gmail.com) Mandi{H.P.]

 
 Naxalites can not be referred to as anti-development or anti-people. They can only be accused for violence. Both BJP and Congress have exploited the tribals and the urban poor alike.Both the parties have persued policies to uproot poor from their homes and hearths to accomodate the rich to expoit the natural resources, which provided livelihood to the deprived sections of our population from time immemorial. Now if Raman Singh is accusing former congress Chief Minister Digvijay Singh of Madhya Pradesh for the situation in the so called Red-Corridor, is not just.It appears more as a ploy to divert the public attention from major issues of developmental policies to non-issue of petty party-politics.If they are honest in their search for sustainable solution to the naxal menace they should come out openly and denounce anti-people and pro-American- imperialism neo-liberal economic policies.They should ask their party bosses to denounce SAP that is structural adjustment programme and return to the bsic Gandhian thought of serving the man sitting at the lowest rung of social hegemony whom BJP ideologue called Antya meaning the 'last one'.All such last men are now in jungles whom your 'green hunt' programme is targeting. Please shift your target from these men and fix it on neo-liberal economic policies.Hunt these anti-people policies to save precious human lives and hard earned independence and democracy.  
   
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