पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना > > Print | Share This  

इशरत जहां केस: चिदंबरम के खिलाफ सुनवाई होगी

इशरत जहां केस: चिदंबरम के खिलाफ सुनवाई होगी

नई दिल्ली. 1 मार्च 2016
 

पेट्रोल

सर्वोच्च न्यायालय उस जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करेगा, जिसमें पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम पर इशरत जहां मामले में शीर्ष अदालत और गुजरात उच्च न्यायालय में झूठी गवाही देने और गुमराह करने का आरोप लगाते हुए अदालत से स्वत: उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने की मांग की गई है.

इस जनहित याचिका में तत्कालीन केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक पर भी गुमराह करने और इशरत जहां के लश्कर से रिश्ते को शीर्ष अदालत से छुपाने के आरोप में अवमानना की कार्रवाई करने की मांग की गई है.

सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश टी.एस. ठाकुर और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की पीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता एम.एल. शर्मा से पूछा कि क्या आपने याचिका दााखिल की है. याचिका को सामान्य प्रक्रिया के तहत सूचीबद्ध होने दीजिए.

शर्मा ने पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली की गवाही के आधार पर अपनी जनहित याचिका में कहा कि इशरत जहां एलईटी की सदस्य थी. उन्होंने इशरत जहां की हत्या के आरोप में मुकदमा झेलने वाले गुजरात पुलिस के अधिकारियों के लिए 'उचित मुआवजे' की भी मांग की.

चिदंबरम के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग करते हुए शर्मा ने गृह मंत्रालय द्वारा गुजरात उच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि इसमें कहा गया था कि इशरत जहां लश्यर की सदस्य नहीं है. इसमें पहले दाखिल किए गए हलफनामे को भी हल्का कर दिया गया, जिसमें उसके लश्कर से रिश्तों की बात कही गई थी.

गृह मंत्रालय ने अपने पहले के हलफनामे में इशरत जहां और उसके सहयोगियों जावेद शेख, जीशान जोहर और अमजद अली राना के लश्कर से जुड़े होने की बात कही थी.

सीबीआई के तत्कालीन निदेशक के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए शर्मा ने याचिका में कहा है कि सीबीआई ने भी शीर्ष अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में फेरबदल करते हुए तथ्यों से छेड़छाड़ की. सीबीआई ने अदालत में आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र दाखिल कर इशरत जहां को एक मासूम मुस्लिम लड़की बताया था.

कानून पर सवाल उठाते हुए शर्मा ने अपनी जनहित याचिका में कहा है कि भारतीय नागरिकों को संविधान की धारा 21 के तहत जो जीवन का अधिकार और व्यक्तिगत स्वंत्रतता प्राप्त है, अगर वह लश्कर के सदस्यों को भी है. अगर किसी भी तरीके से आतंकवादी को मारना दंड संहिता के तहत एक अपराध है तो इसमें शामिल पुलिसवालों को सजा दी जानी चाहिए.

इशरत जहां को गुजरात पुलिस ने 2005 में एक 'मुठभेड़' में मार गिराया था. इशरत पर आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) की सदस्य होने का आरोप है.
 


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in