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अपमान सह दलितों को सम्मान दिलाया बाबासाहब ने

नई दिल्ली. 17 सितंबर 2015
 

modi

मध्यप्रदेश के महू में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जन्मस्थली से 'ग्रामोदय से भारत उदय अभियान' की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने वंचित, दलितों व शोषितों को हक तथा सम्मान दिलाने के लिए अपमान तक सहा.

प्रधानमंत्री मोदी ने महू स्थित अंबेडकर स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित करने के बाद सैनिक मैदान में आयोजित सभा में कहा कि बाबा साहब अपने मान-सम्मान के लिए नहीं, बल्कि समाज की बुराइयों के खिलाफ जंग छेड़ने वाले नायक थे. समाज के आखिरी छोर पर बैठे दलित, शोषित को बराबरी का हक और सम्मान दिलाने के इसके लिए उन्हें अपमानित भी होना पड़ा, मगर वे अपने मार्ग से कभी विचलित नहीं हुए.


डॉ. अंबेडकर की शिक्षा और योग्यता का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिस महापुरुष के पास इतनी बड़ी ज्ञान संपदा हो, विश्व की गणमान्य विश्वविद्यालय की डिग्री हो, उसने अपने लिए कुछ नहीं लिया. उस कालखंड में अपने लिए लेने-पाने के अवसर भरे पड़े, मगर उन्होंने गरीबों, शोषितों के हक के लिए सारे अवसरों को छोड़कर अपने को इस देश की मिट्टी में खपा दिया.


मोदी ने कहा कि भारत रत्न बाबा साहेब द्वारा देश को सुदृढ़ बनाने के लिए संविधान में की गई अपेक्षाओं और महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज को साकार करने का काम अधूरा है. इसे पूरा करने के लिए विकास के सभी स्रोतों और संसाधनों को गांव की ओर मोड़ने की जरूरत है, क्योंकि विकास के लिए टुकड़ों में काम करने से बात नहीं बनेगी.


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