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चिदंबरम ने छपवाये थे विदेशों में नोट

चिदंबरम ने छपवाये थे विदेशों में नोट

नई दिल्ली. 30 अप्रैल 2010


सरकारी उपक्रमों संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने यह रहस्योद्घाटन किया है कि पी चिदंबरम ने 1997-98 में वित्त मंत्री रहते हुए विदेशों में नोटों की छपाई कराई थी.
चिदंबरम

सरकारी उपक्रमों संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष वी किशोर चंद्र देव ने लोकसभा और राज्य सभा के पटल पर भारत प्रतिभूति मुद्रण तथा मुद्रा निर्माण निगम लिमिटेड के कामकाज की समीक्षा कर छठवां प्रतिवेदन पेश करते हुए यह रहस्योद्घाटन किया कि तत्कालीन सरकार ने अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी की अलग-अलग कंपनियों से सौ और पांच सौ रुपये के नोटों की एक लाख करोड़ रुपये मूल्य की भारतीय मुद्रा का मुद्रण कराने का आदेश देकर भारत की आर्थिक संप्रभुता को खतरे में डाला था.

प्रतिवेदन में बताया गया है कि सौ रुपये वाले 200 करोड़ नोट तथा 500 रुपये के 160 करोड़ नोट बाहर से छपवाये गये थे. इसके तहत अमेरिका की अमेरिकन बैंक नोट कंपनी को सौ रुपये वाले 63.5 करोड़ नोट ब्रिटेन की थॉमस डी लार को सौ रुपये के 136.5 करोड़ नोट तथा जर्मनी की जीसेक एण्ड डेवरिएंट कंसोर्टियम को 500 रुपये के 160 करोड़ नोट छापने का ठेका दिया गया था.

प्रतिवेदन में कहा गया है कि समिति से पूछताछ में भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारियों ने बताया कि नोटों के बड़ी संख्या में मैले- कुचैले और कटे- फ़टे होने के कारण तथा भारतीय नोट मुद्रण मशीनों के दशा ठीक नहीं होने के कारण विदेशी मुद्रण एजेंसियों से नोट मुद्रण कराने का फ़ैसला किया गया था ताकि नोटों की मांग और आपूर्ति में संतुलन बनाये रखा जा सके. स्थायी समिति ने रिवर्ज बैंक के इन तर्क को सिरे से खारिज कर दिया, जिन्हें इस असाधारण निर्णय का आधार बताया गया है. समिति ने इसे अप्रत्याशित बताया है.

बाद में पत्रकारों से बातचीत में वी किशोर चंद्र देव ने कहा कि मुद्रा की छपाई 1997-98 के दौरान हुई थी. उस समय इंद्र कुमार गुजराल प्रधानमंत्री और वर्तमान गृहमंत्री पी चिदम्बरम वित्त मंत्री थे. उन्होंने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि आतंकवादी या राष्ट्रविरोधी तत्वों की उन विदेशी मुद्रण कंपनियों में पहुंच हो अथवा उन कंपनियों से एक ही नंबर के अनेक नोट छाप कर कहीं भारत विरोधी शक्तियों के हाथों धीरे-धीरे देश में प्रचलित कर दिए गये हों जिससे देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचे.

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

sunderlohia (lohiasunder2 @gmail.com) Mandi {H.P].

 
 Congress has to purge its' rank and file. Weed out the political pollutants. Clean its' own image of inheritors of Nehru Gandhian legacy.Sooner the better. Delay can derail . 
   
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