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कसाब करता रहा बचने के उपाय

कसाब करता रहा बचने के उपाय

मुंबई. 3 मई 2010


लश्कर-ए-तैयबा के फिदायीन आतंकी अजमल कसाब ने लगातार कोशिश की कि वह किसी भी तरह से अपने खिलाफ चल रहे मामले को लंबा टाल सके. कभी उसने बीमारी का बहाना बनाया, कभी पेट दर्द का. कभी अदालत के सामने रोया तो कभी गुस्सा दिखाने की कोशिश की. लेकिन अदालत ने कसाब की नौटंकियों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया.
कसाब

भारतीय इतिहास में सबसे तेजी से सुने जाने वाले कसाब मामले की सुनवाई 8 मई 2009 को शुरू हुई थी. इसके लिए मुंबई की आर्थर रोड जेल में एक विशेष अदालत बनाई गई, जिसमें 658 गवाहों के बयान दर्ज हुए. लगभग 271 कामकाजी दिनों में हुई सुनवाई के बाद 3,192 पृष्ठ के सबूत दर्ज हुए. सरकार की ओर से जांच के दौरान जब्त 1,015 लेख अदालत के समक्ष दर्ज कराए और अपने मामले के पक्ष में 1,691 दस्तावेज पेश किये.

पाकिस्तान के फरीदकोट निवासी कसाब पर पर 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हमला कर के 166 लोगों की हत्या करने का आरोप था. इस जनसंहार में 300 से अधिक लोग घायल हो गये थे. उसके दो सहयोगियों, फहीम अंसारी और सबाउद्दीन के खिलाफ फिदायीन आतंकवादियों को नक्शा बना कर मदद करने का आरोप है.

सरकारी वकील उज्ज्वल निकम के अनुसार कसाब एक प्रशिक्षित कमांडो है. वह कुख्यात आतंकी संगठन अल-कायदा की नियमावली का पालन करता है, जिसमें कहा गया है कि पकड़े जाने पर जांच एजेंसियों को हमेशा बहकावे में रखो. निकम बताते हैं कि कसाब एक्टिंग अच्छी कर लेता है. वह किसी पर कभी भी गंभीर आरोप लगा देता है. एक बार वह एक कागज में पावडर लपेटकर ले आया और कोर्ट में कहा कि जेल में उसे जहर देकर मारने की कोशिश की जा रही है. कोर्ट ने पावडर की फोरेंसिक जांच करवाई तो वह पिसा हुआ चावल निकला.

कसाब ने अपने मुकदमें से ध्यान हटाने और मामले को टालने की कोशिश की. उसने एक बार अपने बयान में सारे आरोप स्वीकार करते हुए अदालत से मांग की कि उसे फांसी की सजा दे दी जाये. इसके 6 महीने बाद ही वह अपने बयान से पलट गया. उसने अदालत से कहा कि छत्रपति शिवाजी टर्मिनस में हुई गोलीबारी के वक्त वह मौजूद नहीं था.

उसने कहा कि मुझे 26/11 से तीन दिन पहले गिरफ्तार किया गया था, जब मैं अपने दोस्तों के साथ जुहू इलाके जा रहा था. हमले के वक्त मैं पुलिस हिरासत में था. इस चालबाज अपराधी ने समुंदर के रास्ते छोटी नाव में भारत आने की बात को खारिज करते हुए कहा था कि वह वैध दस्तावेज के साथ फिल्मी हीरो बनने भारत आया था लेकिन गिरफ्तारी के बाद वह खो गया. उसने दावा किया कि उसका मोबाइल फोन भी खो गया और उसे यह नहीं पता है कि उसके दोस्त कहां हैं.


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