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अपने गिरेबान भी देखें अदालतें- होमी कपाडिया

अपने गिरेबान भी देखें अदालतें- होमी कपाडिया

नई दिल्ली. 3 मई 2010


भारत के भावी मुख्य न्यायाधीश होमी कपाड़िया ने कहा है कि अदालतें कभी अपने गिरेबान में भी झांकें. उन्होंने न्यायपालिका को अपनी हद में रहने की भी सलाह दी है.

दिल्ली में आयोजित एक सेमिनार में सरोश होमी कपाड़िया ने जजों को सलाह देते हुए कहा कि नेताओं के अनैतिक आचरण पर टिप्पणियां करते वक्त अपनी गिरेबां में भी झाकें और नैतिकता का उपदेश देने से पहले खुद उस पर अमल करना सीखें.

उन्होंने कहा कि “हम नैतिकता की बात करते हैं तो जज आम तौर पर नेताओं, प्राध्यापकों और छात्रों आदि की नैतिकता की बात करते हैं. पर मैं कहूंगा कि जजों को न केवल वैधानिक नैतिकता, बल्कि वैचारिक नैतिकता का भी खयाल रखना चाहिए.”

बतौर मुख्य न्यायाधीश अपनी नियुक्ति की घोषणा के बाद पहली बार किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए कपाड़िया ने एक ब्रिटिश जज की किताब से कुछ उद्धरण भी दिए. उन्होंने कहा कि एक सीमा के बाद न्यायिक सक्रियता को कानून का राज कायम करने के खिलाफ माना जाता है.

कपाड़िया ने वरिष्ठ वकीलों की भी आलोचना की. उन्होंने कहा कि हमारे यहां वरिष्ठ वकीलों में यह प्रवृत्ति देखने को नहीं मिलती कि वे कानून के छात्रों या पेसी में आए नौजवान वकीलों को पढ़ाने-सिखाने के लिए कुछ वक्त निकालें.