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हिंसा के विरोध में रायपुर से दंतेवाड़ा तक शांति यात्रा

हिंसा के विरोध में रायपुर से दंतेवाड़ा तक शांति यात्रा

रायपुर. 5 मई 2010

माओवादियों तथा राज्य द्वारा हो रही हिंसा के मुद्दे पर बुधवार को छत्तीसगढ़ के रायपुर से दंतेवाड़ा तक शांति यात्रा का आयोजन किया जा रहा है. यह आयोजन आजादी बचाओ आंदोलन के तत्वाधान किया जा रहा है. आजादी बचाओ आंदोलन के सूत्राधार बनवारी लाल शर्मा ने बताया है कि देश के पूर्वी इलाके, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, झारखंड और विशेष तौर पर छत्तीसगढ़ में राज्य और माओवादियों द्वारा किये जा रहे हिंसा में बड़ी संख्या में गरीब लोग विशेष कर आदिवासी मारे जा रहे हैं. ऐसे में देश में शांति और अहिंसा का माहौल बनाए रखने के लिए इस शांति यात्रा का आयोजन हो रहा है.

इस यात्रा में शामिल होने के लिए देश भर से बुद्धिजीवियों का जमावड़ा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हो रहा है. श्री शर्मा के अनुसार इस शांति यात्रा में भाग लेने के लिये प्रसिद्ध शिक्षाविद् और यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर यशपाल, बॉयोसाइंटिस्ट डॉ. पी एम भार्गव, प्रसिद्ध गांधीवादी और गुजरात विद्यापीठ के चांसलर नारायण देसाई, सुप्रसिद्ध पत्रकार कुलदीप नैयर, दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस राजेंद्र सच्चर, सर्वोदयी कार्यकर्ता अमरनाथ भाई और लावणम, गांधी शांति प्रतिष्ठान की अध्यक्ष राधा बहन, शिक्षाविद् प्रोफेसर अनिल सद्गोपाल, इतिहासकार और शहीद भगत सिंह के भांजे प्रोफेसर जगमोहन सिंह, मैगसेसे पुरस्कार विजेता अरविंद केजरीवाल रायपुर आ रहे हैं.

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

sunderlohia (lohiasunder2 @gmail.com) Mandi ( H.P}.

 
 It is a welcome move by the leading lights of the land.The peaceloving but silent section of our country has ultimately decided to act. Whole nation will support this venture.Let Maoist be positive towards this type of peoples' initiative.If the Maoists cold shoulder peoples' initiative they will loose the sympathies of the larger section of society and would damage their cause .

At the present moment Maoists have brought the issue
of "development with dignity" as the main cause of the violence.Let people persuade their representatives to take note of this problem in its' totality.We should persuade the state power also to shed its' combatative attitude.
 
   
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