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अजमल आमिर कसाब को फांसी की सज़ा

अजमल आमिर कसाब को फांसी की सज़ा

मुंबई. 6 मई 2010

नवंबर 2008 को मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों के एकमात्र जीवित हमलावर अजमल आमिर कसाब को गुरुवार को मुंबई की एक विशेष अदालत ने फांसी की सज़ा सुनाई है. कसाब को भारतीय दंड संहिता की चार धाराओं के अंतर्गत फांसी की सज़ा सुनाई गई है जबकि एक धारा के अंतर्गत उम्रकैद की सज़ा सुनाई है. विशेष अदालत के जज टहिलायनी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कसाब एक किलिंग मशीन है और अगर उसके खिलाफ मौत की सज़ा नहीं सुनाई जाती है तो लोगों के न्याय पर से विश्वास उठ जाएगा.

 इस मुद्दे पर बोलते हुए मुंबई पुलिस के संयुक्त पुलिस अधिक्षक हिमांशु राय ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए बताया कि कसाब को हत्या, हत्या की साज़िश रचने, भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और आपराधिक गतिविधि निरोधक कानून के तहत मौत की सज़ा सुनाई गई है. गौरतलब है कि इससे पहले गत 3 मई को मुंबई की आर्थर रोड जेल में बनी विशेष अदालत ने कसाब पर लगे 86 आरोपों में से 83 आरोपों का दोषी पाया था.

 उल्लेखनीय है कि 28 नवंबर 2008 की रात को अजमल कसाब और 9 अन्य आतंकवादियों ने मुंबई को दो होटलों, छत्रपति शिवाजी रेलवे स्टेशन, कामा अस्पताल, लियोपोल्ड कैफे और कुछ अन्य स्थानों पर हमला किया था. इन हमलों में 166 से ज्यादा लोग मारे गए थ और 300 अन्य घायल हुए थे. बाद में सुरक्षाबलों से मुठभेड़ में 9 आतंकी मारे गए थे जबकि अजमल कसाब जिंदा पकड़ा गया था.

 कसाब को सज़ा सुनाए जाने के बाद पत्रकारों से मुखातिब हुए सरकारी वकील उज्जवल निकम ने इस फैसले पर खुशी ज़ाहिर की. उन्होंने कहा कि कसाब एक निर्मम आतंकी है और इसीलिए वे मानते हैं कि उसे सही सज़ा मिली है. उन्होंने कहा कि भारत जैसे सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में यह मुकदमा बड़ी ही गरिमामई तरीके से लड़ा गया है जिससे भारत ने दुनिया के सामने एक मिसाल रखी है. उन्होंने यह भी कहा कि उन पर पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की ज़िम्मेदारी थी और वे संतुष्ट हैं कि उन्होंने यह जिम्मेदारी अच्छी तरीके से निभाई है.


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