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बलात्कार कानून में बदलाव जल्दबाज़ी में: कोर्ट

बलात्कार कानून में बदलाव जल्दबाज़ी में: न्यायालय

नई दिल्ली. 23 अप्रैल 2018
 

न्यायालय

दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के बलात्कार कानून में संशोधन पर सवाल उठाए हैं. सोमवार को इससे जुड़ी एक याचिका की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने पूछा है कि क्या सरकार ने इस पर लेकर कोई शोध किया है या उसने जल्दबाजी मे ये संशोधन किये हैं.

इस याचिका में मांग की गई थी कि केंद्र सरकार ने साल 2013 में कानून में जो संशोधन किया उसमें पीड़ित महिला को लेकर कोई बात नहीं कही गई. याचिकाकर्ता द्वारा ये मांग की गई कि पीड़ित महिला को लेकर भी उस कानून में प्रावधान रखे जाने चाहिए थे.

इसी दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा बलात्कार कानून में किए गए संशोधन का जिक्र करते हुए पूछा कि "क्या केंद्र सरकार जो कानून लेकर आई है उससे पहले उसने कुछ अध्ययन भी किया था या कानून बस जल्दबाजी में लेकर आया गया है? और क्या इस कानून में पीड़िता को लेकर भी कोई प्रावधान रखा गया है?''

गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए आपराधिक कानून संशोधन अध्यादेश 2018 के मुताबिक, किसी महिला से बलात्कार के मामले में अब न्यूनतम सजा 10 साल के कठोर कारावास की होगी जो उम्रकैद तक विस्तारित हो सकती है.

नए कानून के मुताबिक, नाबालिगों से रेप के मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की व्यवस्था की जाएगी. फॉरेंसिक जांच के जरिए सबूतों को जुटाने की व्यवस्था को और मजबूत करने की व्यवस्था भी की जाएगी. इतना ही नहीं दो महीने में ट्रायल पूरा करना होगा. इस कानून के अनुसार अगर अपील दायर होती है तो 6 महीने में निपटारा करना होगा. नाबालिग के साथ बलात्कार के केस को कुल 10 महीने में खत्म करना होगा.

उल्लेखनीय है कि जम्मू कश्मीर के कठुआ और गुजरात के सूरत जिले में हाल ही में लड़कियों से बलात्कार और हत्या की घटनाओं की पृष्ठभूमि में यह कदम उठाया गया है.
 


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