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नक्सलवाद देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा : मनमोहन

नक्सलवाद देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा : मनमोहन

नई दिल्ली. 24 मई 2010

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को कहा कि नक्सलवाद देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है. श्री सिंह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के दूसरे कार्यकाल के एक साल पूरे होने के अवसर पर राजधानी के विज्ञान भवन में आयोजित एक प्रेस कांफरेंस में पत्रकारों से बात कर रहे थे. उन्होंने कहा कि नक्सलवाद हमारे समाज का सबसे भयावह चेहरा है. उन्होंने यह भी कहा कि यूपीए सरकार ने दूसरे कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं लेकिन मैं ये भी स्वीकार करता हूं कि हम इससे और बेहतर कर सकते थे.

देश के आर्थिक मुद्दों पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हालांकि देश को इस वित्तीय वर्म में 8.5 फीसदी विकास दर (जीडीपी) हासिल करने की उम्मीद है, लेकिन सरकार का लक्ष्य है कि वह हर वर्ष 10 फीसदी विकास दर हासिल करे. उन्होंने कहा कि हमने भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक मंदी के असर से बचाए रखा और आगे भी अच्छी विकास दर हासिल करते रहेंगे. महंगाई के बारे में उन्होंने कहा कि महंगाई पर काबू पाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि सरकार राज्यों के साथ मिलकर चीज़ों की कीमतों पर निगरानी रखेगी और उम्मीद जताई कि महंगाई दर इसी साल दिसंबर तक 5 से 6 फीसदी के बीच आ जाएगी.

श्री सिंह ने भारत-पाक संबंधों के बारे में कहा कि भारत-पाकिस्तान संबंधों में अभी विश्वास की कमी है. उन्होंने कहा कि हम पाकिस्तान से सभी मुद्दों पर बातचीत करना चाहते हैं लेकिन ये तभी संभव होगा जब पाकिस्तान की सरजमीं का इस्तेमाल देश के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए ना हो. हालांकि उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि दोनों देशों के बीच समग्र बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है.

पत्रकारों द्वारा राजनीति में उनके भविष्य के बारे में पूछे जाने पर श्री सिंह ने कहा कि उनकी अभी रिटाय़र होने की कोई योजना नहीं है और वे अपने सारे अधूरे काम पूरे करने के बाद ही इस पर कुछ सोचेंगे. उन्होंने इस बात से भी खंडन किया कि कांग्रेस अध्यक्ष से उनके कोई मतभेद हैं. राष्ट्रीय सलाहकार समिति के बारे में उन्होंने कहा कि ये सिर्फ एक सलाहकार इकाई है न कि कोई सुपर केबिनेट. सरकार के विभिन्न मंत्रियों के विवादास्पद बयानों के बारे में उन्होंने कहा कि मंत्रियों को अपने विचार हर हफ्ते होने वाली कैबिनेट की बैठक में व्यक्त करने चाहिए न कि सार्वजिनक मंचों पर.


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