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पुलिस बल की कमी से चिदंबरम चिंतित

पुलिस बल की कमी से चिदंबरम चिंतित

रायपुर. 2 जून 2010


अखिल भारतीय पुलिस विज्ञान सम्मेलन में केन्द्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम और मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने एक सुर में कहा है कि इस मुश्किल घड़ी में नक्सलवाद से निपटने दोनों सरकारें साथ-साथ हैं. केन्द्रीय गृहमंत्री ने राज्य में पुलिस बल और संसाधनों की भारी कमी की ओर इशारा करते हुए कहा कि प्रदेश में 1 लाख लोगों के पीछे केवल 205 पुलिस कर्मी हैं. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी पुलिस को हाईटेक बनाने पर जोर देते हुए कहा कि आज के दौर नक्सलवाद और अपराधियों से मुकाबला डंडे से नहीं बल्कि दिमाग से ही किया जा सकता है.

राजधानी में बुधवार को 40वीं अखिल भारतीय पुलिस विज्ञान कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर केन्द्रीय गृहमंत्री श्री चिदंबरम ने अपने भाषण के शुरूवात में ही कहा कि छत्तीसगढ़ इस समय मुश्किल के दौर से गुजर रहा है. पिछले कुछ दिनों में दो दर्जन से ज्यादा बड़ी घटनाएं हुई है जिसमें बड़ी संख्या में केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों और पुलिस के जवानों की जानें गई है और काफी लोग घायल हुए हैं. केन्द्र सरकार इस लड़ाई में पूरी तरह राज्य सरकार के साथ है तथा हर संभव मदद के लिए तैयार है.

श्री चिदंबरम ने आंकड़ों के आधार पर राज्य में पुलिस बल और संसाधनों में भारी कमी जैसे खामियों को भी गिनाया. उन्होंने कहा कि देश में छत्तीसगढ़ और झारखंड सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित राज्य हैं. इसके बावजूद यहां पुलिस जवानों की संख्या काफी कम है. जवानों की ट्रेनिंग के लिए केन्द्र तथा पुलिस स्टेशनों की संख्या भी पर्याप्त नहीं है. उन्होंने बताया कि पूरे देश में 21 लाख पुलिस कर्मी है और करीब साढ़े 3 लाख केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों के जवान है. पुलिस कर्मियों की संख्या काफी कम है. इसे बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को तेजी नई भर्तियां करनी चाहिए. उनका मानना है कि पुलिस बल और ट्रेनिंग सेंटर की संख्या मौजूदा स्थिति से कम से कम दुगुने होने चाहिए. उन्होंने कहा कि देश के 12 राज्य ऐसे हैं, जो पुलिस भर्ती में पारदर्शिता नहीं बरत रहे हैं.

उन्होंने कहा कि नक्सलवाद, साइबर क्राईम और खुफिया तंत्र को मजबूत बनाने नए पाठ्यक्रम शुरू करने की जरूरत है. केन्द्र सरकार ने नक्सलवाद और जवानों की ट्रेनिंग के लिए कई प्रशिक्षण संस्थान खोले हैं लेकिन इसमें साल भर में 23 हजार कर्मियों को प्रशिक्षित किया जा सकता है. राज्य सरकार को अपने स्तर पर नए प्रशिक्षण केन्द्र खोलने चाहिए. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की सिफारिशों पर क्रियान्वयन पर भी राज्य सरकार बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दे रही है. केन्द्र सरकार ने सभी राज्यों को नया पुलिस एक्ट, पुलिस स्थापना बोर्ड और पुलिस शिकायत बोर्ड के गठन के निर्देश दिए थे. लेकिन केवल एक दर्जन राज्यों में नया पुलिस एक्ट बन पाया और 14 राज्यों में पुलिस स्थापना बोर्ड व 10 प्रदेशों में शिकायत बोर्ड का गठन किया गया है.

उन्होंने कहा कि नक्सलवाद, आतंकवाद और अपराधियों से निपटने काफी काम करने की जरूरत है. इसके लिए आधुनिक तकनीक, पुख्ता योजनाओं और समन्वय के साथ काम करने की जरूरत है. पुलिस को बेहतर बनाने डाटा मैनेजमेंट, डाटा माइनिंग, ट्रैकिंग नेटवर्क और आधुनिक तकनीकों से लेस होना होगा.

मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि पुलिस के ढांचे में बदलाव की जरूरत है. 21वीं सदी में नक्सली और अपराधी सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रहे हैं. उनके पास इसके लिए पर्याप्त पैसा भी उपलब्ध हो रहा है. ऐसे में पुलिस को भी अपने तंत्र को मजबूत बनाना होगा. उन्होंने कहा कि पुराने समय में अपराधियों को थाने में बुलाया जाता था और रौबदार मूंछों व डंडा धारी हवलदार के पूछताछ में ही अपराधी अपनी जुबान खोल देते थे. लेकिन अब तो डंडा चलाने पर विरोध शुरू हो जाता है.

मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि इस सम्मेलन के बाद विशेषज्ञों की राय और चिंतन के बाद और बेहतर ढंग से इस लड़ाई को जारी रखा जाएगा. उन्होंने बस्तर की आदिवासियों की सराहना करते हुए कि देश में ऐसा पहली बार हुआ जब हिंसा के खिलाफ हजारों की संख्या में आदिवासी एकजुट हुए हैं. यह काम किसी पार्टी का कार्यकर्ता नहीं कर सकता. उनकी ताकत से ही राज्य को ताकत मिली है.

इस सम्मेलन के उद्घाटन मौके पर पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के डीजीपी पी. मुखर्जी और राज्य के डीजीपी विश्वरंजन ने भी अपनी बात रखी. कार्यक्रम में प्रदेश के गृहमंत्री ननकी राम कंवर, संसदीय सचिव विजय बघेल सहित देश भर के 82 आला पुलिस अधिकारी मौजूद थे.

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bhagat singh raipur

 
 जब मुकाबला डंडे से नहीं दिमाग से करना है तो और डंडे इकठ्ठे करने की क्या ज़रूरत है. अब ऐसा लगता है कि सरकार का दिमाग भी डंडे से चलने लगा है.  
   
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