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हिंदू मैरिज एक्ट में कोई बदलाव नहीं

हिंदू मैरिज एक्ट में कोई बदलाव नहीं

नई दिल्ली. 14 जून 2010


उच्चतम न्यायालय ने आज हिंदू मैरिज एक्ट में किसी भी तरह के संशोधन की मांग को खारिज कर दिया है. अदालत ने उस याचिका को खारिज किया, जिसमें एक ही गोत्र में शादी पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी. अदालत ने याचिकाकर्ता को कहा कि इस संबंध में अगर याचिका दायर करनी है तो आप पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट जाएं.

खाप पंचायत काफी दिन से एक ही गोत्र में शादी पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं. वे चाहते हैं कि जल्द से जल्द हिंदू मैरिज एक्ट में बदलाव किया जाए.

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले हिंदू मैरिज एक्ट में बदलाव को लेकर हरियाणा की कई खापों के प्रतिनिधियों ने चंड़ीगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा से मुलाकात की थी. जिसके बाद हुड्डा ने खाप पंचायतों का समर्थन करते हुए कहा कि एक ही गोत्र में शादी करना गलत है और हिंदू मैरिज एक्ट में बदलाव होना चाहिए.

हुड्डा ने तो यहां तक कह डाला कि देश में यह एक गंभीर विषय है और इस पर सभी पार्टियों को एक साथ मीटिंग करके समाधान निकालना चाहिए. इसके पहले कांग्रेस के नवीन जिंदल ने भी खाप पंचायतों का समर्थन करते हुए हिंदू मैरिज एक्ट में बदलाव की मांग की थी.
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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Pallav Journo delhi

 
 I think, the feudal roots of ancient india are in the same way preserved in this modern democracy. How can a CM like huda gave a open handed support to such a barbarians, who want to crush the human freedom?

Our rural areas particularly of UP, Haryana and Punjab has a long history of Khap like traditions, It is obvious that the politicians who are mentioned in this article have impact of their class-roots. But somehow our government and the judiciary must have to take stern measures to ensure that "Khaps" get abolished in the same way as "Sati" was. It must be disgraded to such an extent that people will start feeling a "shame factor" while thinking on such lines.

But i personaly felt that it is an irony of our democracy that a government hesitates to take stern measures because of the fear of a vote bank shift. An All party unity can only ensure greater hope.
 
   

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