पहला पन्ना > मुद्दा > दिल्ली Print | Send to Friend | Share This 

पुलिस कुत्ता खोजती है कातिल नहीं

पुलिस कुत्ता खोजती है कातिल नहीं

नई दिल्ली. 18 जून 2010


दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा है कि अगर पुलिस के आला अधिकारी का कुत्ता खो जाये तो पुलिस पूरे शहर को छान सकती है लेकिन यह लोगों को सुरक्षा नहीं मुहैया करवा सकती. दिल्ली में ऑनर किलिंग के मामलों में लोगों को नहीं बचा पाने पर पुलिस को आड़े हाथों लेते हुए अदालत ने कहा कि पुलिस भी धन के लिए परिवारों के साथ मिली हुई है.

अवकाशकालीन न्यायाधीश एसएन. धींगरा ने यह बात उस समय कही जब दिल्ली उच्च न्यायालय विधिक सेवा सहायता प्राधिकरण ने हाल के एक मामले का संकेत दिया था, जिसमें एक युवक एक लड़की के साथ भाग गया था और लड़की के माता-पिता की शिकायत पर लड़के को जेल में डाल दिया गया. प्राधिकरण की वकील का कहना था कि विवाह के बाद गर्भवती लड़की को उसके माता-पिता ने छोड़ दिया है और जिस युवक को वह चाहती है, उसे लड़की के माता-पिता के दबाव में मकदमों में डाल कर जेल में भेज दिया है.

अवकाशकालीन न्यायाधीश एसएन. धींगरा ने लड़कियों के भागने के मामलों को बलात्कार में बदलकर लड़कों को सलाखों के पीछे भेजने पर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई. उन्होंने कहा कि ऑनर किलिंग के भी सभी मामलों में पुलिस शामिल है. पुलिस माता-पिताओं से मिली हुई है. वह बलात्कार के आरोप में लड़कों को जेल में भेज देती है और माता-पिताओं को अपनी बेटी की हत्या करने देती है.

अवकाशकालीन न्यायाधीश एसएन. धींगरा ने पुलिस को फटकारते हुए कहा कि यदि आपके आला अधिकारी का कुत्ता खो जाता है तो आप पूरा शहर छान सकते हो लेकिन लोगों को सुरक्षा नहीं मुहैया करा सकते. जब आपको शर्म ही नहीं है तो मानवीयता के बारे में क्या बात करना.

ज्ञात रहे कि 30 मार्च 2008 को दिल्ली पुलिस आयुक्त का कुत्ता खो गया था और पुलिस जवानों ने पूरे शहर में इसकी खोज की थी.

न्यायमूर्ति धींगरा ने कहा, थोड़े पैसों के लिए आप इतने असंवेदनशील कैसे हो सकते हैं. प्रेम विवाह और भाग कर शादी करने वालों को जेल में डालने पर भी अदालत ने कहा कि इस तरह की हरकतों से पुलिस आम नागरिकों को अपराधी बना रही है.